दून हॉराइज़न, देहरादून (17 अगस्त 2026): पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वहां के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा भारतीय मुसलमानों को लेकर दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इन बयानों को पूरी तरह शर्मनाक बताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान भारत के मुसलमानों का ठेकेदार बनने की कोशिश बिल्कुल बंद करे।
पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के साथ जोड़कर भारतीय मुसलमानों का स्वघोषित संरक्षक दिखाने की नाकाम कोशिश कर रहा है। भारत के मुसलमानों ने कभी भी पाकिस्तान को गंभीरता से नहीं लिया। जिस देश की अपनी कोई सांस्कृतिक पहचान और बुनियादी वजूद नहीं है, उसे भारत या यहां के अल्पसंख्यकों को सीख देने का कोई हक नहीं है।
भारत का मुसलमान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। हम पहले भारतीय हैं और उसके बाद मुसलमान। पाकिस्तान धर्म और नफरत की बुनियाद पर खड़ा किया गया एक मुल्क है।
साल 1947 के बंटवारे के दौरान ही इस देश के उलेमा और प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने पाकिस्तान के विचार को पूरी तरह नकार दिया था। दारुल उलूम देवबंद जैसे बड़े मजहबी और ऐतिहासिक संस्थानों ने उस वक्त पाकिस्तान के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया था। भारत के आम मुसलमानों ने उसी दौर में कट्टरता पर टिकी उस विभाजनकारी मानसिकता को खारिज कर दिया था।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति के उस बयान पर भी कड़ा प्रहार किया गया जिसमें उन्होंने अपने देश में 4 प्रतिशत हिंदुओं को बर्दाश्त (टॉलेरेट) करने का दावा किया था। भारत में किसी को किसी की दया पर ‘टॉलेरेट’ नहीं किया जाता। यहां देश का मजबूत संविधान लागू है, जो हर नागरिक को बराबर की ताकत देता है।
यह मुल्क जितना हिंदू भाइयों का है, उतना ही अधिकार इस देश के मुसलमानों का भी है। पाकिस्तान के हुक्मरानों की घटिया मानसिकता भारत की लोकतांत्रिक जमीन पर काम नहीं करती। भारतीय मुसलमान इसी मिट्टी के लिए जीता है और इसी तिरंगे के लिए अपनी जान कुर्बान करता है।
पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी नापाक सोच और गलतफहमी को अपनी जेब में रखें और अपनी सीमाओं में रहना सीखें। जिस नफरत भरी सोच पर पाकिस्तान चल रहा है, आने वाले समय में उस मुल्क का भविष्य बेहद अंधकारमय होने वाला है।









