दून हॉराइज़न, देहरादून (18 अगस्त 2026): राजधानी की सड़कों पर तेज रफ्तार और अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने सीधा डिजिटल दखल शुरू किया है। जिले के 11 सबसे जोखिम भरे ब्लैक स्पॉट की पूरी मैपिंग गूगल को सौंप दी गई है। सिस्टम अपडेट होते ही इन रास्तों से गुजरने वाले हर चालक के मोबाइल स्क्रीन पर नेविगेशन के साथ खतरे का अलर्ट चमकेगा।
सड़क सुरक्षा के इस मॉडल में सभी 11 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के सटीक जीपीएस कोऑर्डिनेट्स, मोड़ के नाम और जमीनी ब्योरे को शामिल किया गया है। रात के वक्त जब दृश्यता कम होती है या वाहन चालक अनजान रास्तों पर तेज गति से निकलते हैं, ठीक उसी वक्त यह सिस्टम काम करेगा। मोड़ आने से पहले ही स्क्रीन पर अलर्ट फ्लैश होगा और ऑडियो संदेश के जरिए रफ्तार धीमी करने की चेतावनी मिलेगी।
करीब तीन साल पहले तक देहरादून जिले की सड़कों पर 47 ऐसे खतरनाक पॉइंट दर्ज थे जहां लगातार जानें जा रही थीं। लोक निर्माण विभाग, प्रशासन और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमों ने इन जगहों पर सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई, नए साइन बोर्ड लगाए, स्ट्रीट लाइट दुरुस्त की और रंबल स्ट्रिप्स बिछाए। इन जमीनी सुधारों के चलते 36 पॉइंट खतरे के दायरे से बाहर हो चुके हैं और अब सक्रिय ब्लैक स्पॉट की संख्या घटकर 11 पर आ गई है।
पुराने ब्लैक स्पॉट सुधरने के बावजूद शहर के कुछ नए इलाकों में वाहनों की भिड़ंत के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मोहब्बेवाला क्षेत्र इस समय नए एक्सीडेंट हॉटस्पॉट के तौर पर उभरा है जहां लगातार गाड़ियां टकरा रही हैं। स्थानीय पुलिस इस नए कॉरिडोर की अलग से निगरानी कर रही है और यहां के ट्रैफिक फ्लो का डेटा भी जुटाया जा रहा है।
एसपी ट्रैफिक जितेंद्र चौधरी का कहना है कि सिर्फ चौराहों पर पुलिस जवान खड़े कर देने भर से हादसों पर पूरी तरह रोक लगाना मुमकिन नहीं है। चालकों के हाथ में मौजूद मोबाइल स्क्रीन पर अगर जोखिम भरे रास्तों की पूर्व चेतावनी पहुंच जाए, तो वे खुद गाड़ी की गति नियंत्रित कर लेते हैं। इसी मकसद से गूगल मैप के साथ यह सीधा तकनीकी समन्वय स्थापित किया गया है।









