दून हॉराइज़न, देहरादून (18 अगस्त 2026): चम्पावत जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवीधुरा में लंबे समय से चली आ रही वाहनों की अव्यवस्था और पार्किंग संकट को खत्म करने के लिए शासन ने ठोस कदम उठाया है। पाटी तहसील के ग्राम देचमार में प्रस्तावित मल्टी लेवल कार पार्किंग प्रोजेक्ट को विभागीय व्यय समिति की बैठक में ₹980.23 लाख की लागत पर सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। यह प्रस्ताव अब अंतिम वित्तीय अनुमोदन के लिए वित्त विभाग के पास भेजा जा रहा है।
सचिवालय में आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय तकनीकी व वित्तीय समीक्षा बैठक में प्रोजेक्ट के नक्शे और उपयोगिता में सीधा बदलाव किया गया। मूल प्रस्ताव में शामिल की गई दुकानों, कमर्शियल कैफे और दोपहिया पार्किंग के हिस्से को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। मौके की जमीनी जरूरत को देखते हुए अधिकारियों को पूरा ढांचा सिर्फ और सिर्फ 83 चौपहिया कारों की पार्किंग के हिसाब से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
देवीधुरा मां वाराही धाम और ऐतिहासिक बग्वाल मेले के आयोजन का मुख्य केंद्र है। मेले के समय बाहरी जिलों और राज्यों से हजारों गाड़ियां एक साथ इस संकरे पहाड़ी क्षेत्र में दाखिल होती हैं। पार्किंग के अभाव में गाड़ियां मुख्य सड़क की पटरियों पर बेतरतीब खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे घंटों लंबा जाम लग जाता है। नई बहुमंजिला पार्किंग बनने से बग्वाल मेले के अलावा पूरे साल आने वाले तीर्थयात्रियों के वाहन सीधे निर्धारित लेन में पार्क हो सकेंगे।
परियोजना की लागत तय करने के लिए विस्तृत तकनीकी पड़ताल की गई है। शुरुआत में निर्माण एजेंसी की ओर से ₹994.80 लाख का एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया था। पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत का प्रोजेक्ट होने के चलते नियोजन विभाग के तकनीकी संप्रेक्षा प्रकोष्ठ (टीएसी) ने पूरे आगणन की बारीकी से जांच की। टीएसी परीक्षण के बाद ₹980.23 लाख की संशोधित राशि को तकनीकी रूप से सही माना गया।
निर्माण के लिए भूमि की पैमाइश और चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। देवीधुरा पट्टी के ग्राम देचमार में खाता-खतौनी संख्या 16 के खसरा नंबर 1864 के तहत दर्ज 0.88 हेक्टेयर पंचायत वन भूमि को प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित किया गया है। यह जमीन देवीधुरा मेला मैदान के बिल्कुल पास मुख्य मार्ग से सटी हुई है, जिसे वन विभाग की ओर से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय खर्चों को भी मूल बजट में समाहित कर दिया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी चम्पावत द्वारा निर्धारित एनपीवीओ, प्रतिकरात्मक पौधरोपण, सॉइल एंड मॉइस्चर कंजर्वेशन प्लान और वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान के तहत तय ₹34,66,057 की राशि कैंपा फंड में जमा कराई जाएगी। विभागीय बैठक में तय हुआ कि इस पर्यावरणीय मद के लिए अलग से कोई अतिरिक्त बजट नहीं मांगा जाएगा।
पहाड़ी भूभाग की संवेदनशीलता को देखते हुए ढांचागत सुरक्षा पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मौके पर काम शुरू होने से पहले चम्पावत के सहायक भू-वैज्ञानिक की जियोलॉजिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट के सभी सुरक्षा मानकों को निर्माण डिजाइन में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। किसी भी तरह के भू-धंसाव के खतरे को रोकने के लिए ढलानों पर मजबूत रिटेनिंग वॉल और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाएगा।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि पहाड़ी पर्यटन केंद्रों में खाली जगह का शत-प्रतिशत उपयोग केवल यातायात समाधान के लिए होना चाहिए। पार्किंग भवन के भीतर पर्यटकों और स्थानीय चालकों की सुविधा के लिए आधुनिक शौचालय और एक केयरटेकर रूम का निर्माण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग से अंतिम मुहर लगते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।









