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उत्तराखंड में 4 नेशनल हाईवे समेत 138 सड़कें बंद, आठ जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी

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दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितंबर): उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मानसून की बारिश लगातार मुश्किलें खड़ी कर रही है। भूस्खलन और मलबा गिरने की वजह से प्रदेशभर में चार नेशनल हाईवे समेत 138 मोटर मार्ग यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो गए हैं।

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राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operation Centre – SEOC) द्वारा 7 सितंबर की सुबह जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, सीमांत पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले में हाईवे बाधित होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। इस बीच मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने आज नैनीताल, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी और चमोली जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का येलो अलर्ट जारी किया है।

चारधाम यात्रा: 49.47 लाख से अधिक पहुंचे यात्री, स्वास्थ्य कारणों से 218 मौतें

खराब मौसम और भूस्खलन की चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा (Chardham Yatra 2026) में श्रद्धालुओं की आमद जारी है। रविवार शाम तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चारों धामों में अब तक कुल 49 लाख 47 हजार 387 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ धाम में सबसे अधिक 16,99,824 और केदारनाथ धाम में 14,80,579 तीर्थयात्रियों ने मत्था टेका। गंगोत्री में 7.71 लाख और यमुनोत्री में 6.91 लाख श्रद्धालु पहुंचे। वहीं, हेमकुण्ड साहिब में 3.03 लाख से अधिक यात्रियों ने हाजिरी लगाई।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेहत पर मौसम की मार भी दिखी है। आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों (Cardiac and High Altitude Issues) से अब तक कुल 213 सामान्य मौतें हुई हैं, जिनमें सर्वाधिक 99 केदारनाथ और 70 बद्रीनाथ धाम में दर्ज की गईं। आपदा जनित हादसों में 5 लोगों की जान गई है, जबकि केदारनाथ रूट पर 2 लोग अभी भी लापता हैं। रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल मार्ग पर छोड़ी गदेरे के पास एक तीर्थयात्री के खाई में गिरने की खबर के बाद राहत एवं बचाव टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला।

138 सड़कें अवरुद्ध, सीमांत इलाकों में हाईवे पर थमे पहिए

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 4 राष्ट्रीय राजमार्ग, 6 स्टेट हाईवे, 4 जिला मार्ग, 28 पीडब्ल्यूडी और 96 पीएमजीएसवाई की सड़कें मलबे के कारण ठप पड़ी हैं। सीमांत पिथौरागढ़ में तवाघाट-गुंजी, धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-सोबला मार्ग बंद होने से सीमावर्ती क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। नैनीताल में काकड़ागाड़ के पास ज्योलीकोट-भवाली-क्वारब एनएच-109 पर यातायात ठप है।

अल्मोड़ा के सोमेश्वर में सर्वाधिक 96 मिमी, नैनीताल के हल्द्वानी में 70 मिमी और ऊधम सिंह नगर के सितारगंज में 94 मिमी बारिश दर्ज की गई। चमोली जिले के थराली, नारायणबगड़ और देवाल क्षेत्र में 33 केवी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांवों में बत्ती गुल हो गई है, जिसे बहाल करने के लिए ऊर्जा निगम की टीमें जुटी हुई हैं।

नदियों का जलस्तर नियंत्रण में, 13 सितंबर तक अलर्ट पर प्रशासन

राहत की बात यह है कि गंगा, अलकनंदा, भागीरथी और मंदाकिनी समेत राज्य की प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। टिहरी बांध की झील का जलस्तर 826.08 मीटर दर्ज किया गया, जो कि पूर्ण भराव क्षमता 830 मीटर से करीब 4 मीटर कम है। हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर 292.60 मीटर पर बना हुआ है, जो खतरे के निशान (294.00 मीटर) से 1.40 मीटर नीचे है।

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आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नदियों में आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा शून्य है। हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 10 और 11 सितंबर को देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में दोबारा भारी बारिश का दौर तेज हो सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर यात्रा कर रहे चालकों को पत्थरों के गिरने के प्रति सचेत रहने और रात के समय सफर से बचने की हिदायत दी है।

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