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पूर्व सीएम हरीश रावत ने किया कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफे का एलान, पूर्व ओएसडी पर ईडी रेड के बाद उठाया कदम

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दून हॉराइज़न, देहरादून (12 सितंबर): राज्य की सियासत में शनिवार को उस वक्त बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी संगठनात्मक दायित्वों से अलग होने का ऐलान कर दिया। यह फैसला उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया छापेमारी के तुरंत बाद आया है।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि यदि उनके किसी सहयोगी के चलते पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई पर कोई आंच आती है, तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ईडी की कार्रवाई और संगठन से दूरी का फैसला

मामला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC Paper Leak) और ग्राम सेवक भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। बीते दिनों जांच एजेंसी ने चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें 32 लाख रुपये नकद, 12 महंगी घड़ियां और करीब 200 ग्राम सोना बरामद करने की बात सामने आई थी। एजेंसी का दावा है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान ओएमआर शीट में हेरफेर करने वाले सिंडिकेट से यह तार जुड़े हैं।

हालांकि हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उन्हें जीना पर लगे आरोपों पर यकीन नहीं है, लेकिन यदि जांच में धांधली साबित हुई तो यह उनके सार्वजनिक जीवन के लिए गहरी शर्मिंदगी होगी। उन्होंने कहा कि वह किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की स्थाई आमंत्रित सदस्यता दोनों से तत्काल प्रभाव से हट रहे हैं।

चुनावी नरेटिव और केंद्रीय एजेंसियों पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में राजनीतिक टाइमिंग की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि चुनावों से पहले एक खास तरह का राजनीतिक नरेटिव गढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। रावत के मुताबिक, पार्टी नेता राहुल गांधी जब देश भर में युवाओं और छात्रों के हक में आवाज उठा रहे हैं, तब विरोधियों को संगठन पर सवाल उठाने का कोई मौका नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता अक्सर राजनीतिक समीकरणों को देखकर तय होती है और उनके पूर्व सहयोगी के बहाने सीधे कांग्रेस के संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

भर्ती आयोग के गठन पर दी सफाई, मांगी माफी

हरीश रावत ने 2014 से 2017 के अपने मुख्यमंत्रित्व काल का जिक्र करते हुए कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और विभिन्न भर्ती बोर्डों का गठन युवाओं को पारदर्शी रोजगार देने के इरादे से किया गया था। उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गईं। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेनि) भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया था।

रावत ने साफ शब्दों में लिखा कि यदि उस व्यवस्था के दौरान किसी गलत व्यक्ति के चयन का ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ था, तो वह इसके लिए उत्तराखंड की जनता से खुले दिल से क्षमा मांगते हैं। राज्य में विधानसभा सत्र और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच रावत के इस कदम ने कांग्रेस संगठन के भीतर हलचल तेज कर दी है।

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