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उपनल कर्मचारियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन और डीए, धामी सरकार ने जारी किया शासनादेश

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दून हॉराइज़न, देहरादून (16 सितम्बर): उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी महकमों में सेवाएं दे रहे हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए आखिरकार बहुप्रतीक्षित राहत की खबर आ गई है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (UPNL) के जरिए आउटसोर्स आधार पर तैनात कार्मिकों को संबंधित पदों के न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) का लाभ चरणबद्ध तरीके से देने का शासनादेश जारी कर दिया है।

सालों से सड़कों से लेकर नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ की कानूनी लड़ाई लड़ रहे इन कार्मिकों के लिए यह फैसला आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत साबित होगा।

शासन की ओर से सचिव सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कर्मचारियों को इस वित्तीय लाभ के दायरे में लाने के लिए तीन चरणों का कट-ऑफ फॉर्मूला तय किया गया है।

तीन चरणों में इस तरह मिलेगा लाभ

सरकार ने बजट और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को तीन हिस्सों में बांटा है। सबसे पहले उन कार्मिकों को लाभ मिलेगा जो 01 जनवरी 2016 से पूर्व विभाग में नियोजित हो चुके थे। इनके संबंध में प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है।

दूसरे चरण के तहत 01 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच कार्यभार ग्रहण करने वाले उपनल कर्मी लाभान्वित होंगे। वहीं, अंतिम यानी तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से लेकर 15 अक्टूबर 2024 तक सेवा में आए कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और अनुमन्य डीए दिया जाएगा। 15 अक्टूबर 2024 की सीमा तय होने से हालिया वर्षों में जुड़े युवा आउटसोर्स कर्मियों को भी इसका हिस्सा बना लिया गया है।

सरप्लस कर्मचारियों के समायोजन और नए पदों पर स्थिति स्पष्ट

कई विभागों में स्वीकृत पदों से कहीं ज्यादा उपनल कर्मचारी तैनात हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ था। शासनादेश ने इस पर तस्वीर साफ कर दी है। जिन विभागों में स्वीकृत या सृजित ढांचागत पदों के मुकाबले अतिरिक्त उपनल कर्मी कार्यरत हैं, उन्हें उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि की वरिष्ठता सूची (Seniority Order) के आधार पर उपलब्ध पदों पर समायोजित किया जाएगा।

लेकिन अगर किसी विभाग में पद खाली न हों, तब क्या होगा? शासन ने इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों में रिक्त चल रहे समकक्ष पदों पर इन कर्मियों को भेजा जाएगा। इतना ही नहीं, यदि समकक्ष पद भी उपलब्ध न हों, तो कार्मिकों के लिए विशेष रूप से अधिसंख्य (Supernumerary) पदों के सृजन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी और विवाद निपटारे के लिए शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय पृथक समिति गठित की जा रही है।

निगमों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर जिम्मेदारी

सीधे सरकारी विभागों के अलावा प्रत्यक्ष अनुबंध (Direct Contract) पर कार्यरत पूर्व उपनल कर्मियों को भी तय मानकों के अनुसार न्यूनतम वेतन और डीए मिलेगा। हालांकि, प्रदेश के विभिन्न निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं (Autonomous Bodies) के संदर्भ में सरकार ने आर्थिक दायित्व सीधे अपने ऊपर नहीं लिया है। इन निकायों में काम कर रहे उपनल कर्मियों को यह लाभ देने का अंतिम फैसला संबंधित बोर्ड अपने स्तर पर करेंगे और इसका वित्तीय भार भी उन्हें अपने आंतरिक स्रोतों से ही उठाना होगा।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने के बाद विभिन्न विभागों में काम कर रहे तकनीकी, क्लर्क और फील्ड स्तर के आउटसोर्स कर्मियों के मासिक वेतन में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिलेगा।

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