दून हॉराइज़न, देहरादून (16 सितंबर): राजधानी देहरादून में सरकारी जमीनों पर वर्षों से जमे अवैध कब्जों को ढहाने के लिए जिला प्रशासन ने अब डिजिटल घेराबंदी तेज कर दी है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने साफ हिदायत दी कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा।
माननीय नैनीताल उच्च न्यायालय और शासन के निर्देशों की अवहेलना पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। अफसरों को दो टूक कहा गया—काम में हीलाहवाली सीधे कार्रवाई को न्योता देगी।
12 महकमों पर गिरी गाज, 100 से अधिक लंबित मामलों में अल्टीमेटम
बैठक के दौरान सामने आया कि कई महकमे डिजिटल सीमांकन को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। डीएम ने विजिलेंस, उच्च शिक्षा निदेशालय, शहरी विकास निदेशालय, राज्य सूचना प्रौद्योगिकी एजेंसी (ITDA), राज्य संपदा विभाग और यूकॉस्ट (UCOST) समेत उन 12 विभागों को तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाने का आदेश दिया, जिन्होंने अब तक काम शुरू ही नहीं किया।
वहीं, जिन विभागों की 100 से अधिक परिसंपत्तियों की पॉलीगॉन मैपिंग लटकी हुई है, उन्हें चेतावनी नोटिस थमाया जा रहा है। लापरवाही बरतने वाले अफसरों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) पर प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज होने का भी खतरा मंडरा रहा है।
सेटेलाइट मैपिंग और यूके-जीएएमएस पोर्टल से कसेगा शिकंजा
प्रशासनिक अमला अब मैन्युअल नापजोख के बजाय वैज्ञानिक पद्धति अपना रहा है। सभी महकमों को अपनी परिसंपत्तियों का सेटेलाइट पॉलीगॉन मैप (Satellite Polygon Mapping) तैयार कर उसे ‘उत्तराखंड सरकारी परिसंपत्ति प्रणाली’ यानी यूके-जीएएमएस (UK-GAMS) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। यह डिजिटल रिकॉर्ड सीधे जीआईएस (GIS) कोऑर्डिनेट्स से जुड़ा रहता है, जिससे जमीन के रकबे में रत्ती भर भी हेरफेर मुमकिन नहीं होगी। पोर्टल पर जैसे ही किसी अवैध निर्माण या बाउंड्री की ओवरलैपिंग दिखेगी, टास्क फोर्स मौके पर पहुंचकर उसे तुरंत ध्वस्त करेगी।
16 महकमों का काम पूरा, बाकी 41 को युद्धस्तर पर जुटने के निर्देश
समीक्षा में सामने आया कि जनपद के 16 विभागों ने अपने सभी भूखंडों की मैपिंग शत-प्रतिशत पूरी कर ली है, जबकि 41 अन्य विभागों में काम चल रहा है। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, एमडीडीए के संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, लोनिवि के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार और जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शशिकांत गिरी सहित तमाम लाइन डिपार्टमेंट्स के अधिकारी मौजूद रहे।
दरअसल, दून घाटी में बेशकीमती जमीनों पर भूमाफिया और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की शिकायतें लगातार शासन तक पहुंचती रही हैं। अब सीधे व्यक्तिगत जवाबदेही तय होने से महकमों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।









