दून हॉराइज़न, देहरादून (18 सितंबर) : देवभूमि में कानून व्यवस्था और आपराधिक डेटा प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कामयाबी सामने आई है। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) की ताजा समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ कि उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। प्रशासनिक स्तर पर डिजिटल तकनीकों के बेहतर इस्तेमाल से राज्य की रैंकिंग में यह उछाल आया है।
सीसीटीएनएस और आईसीजेएस में सुधरी स्थिति
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हाल ही में राज्य शीर्ष समिति की बैठक बुलाई गई थी। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान गृह विभाग के अधिकारियों ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड में उत्तराखंड ने जुलाई 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर 9वां स्थान हासिल कर लिया है। पिछली समीक्षा के दौरान राज्य 13वें पायदान पर था, जिसका मतलब है कि पुलिस महकमे ने चार स्थानों का सीधा सुधार दर्ज किया है।
इसके अलावा, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) डैशबोर्ड के मामले में तो राज्य का प्रदर्शन और भी शानदार रहा है, जहां उत्तराखंड देश भर में तीसरे स्थान पर काबिज है। इस प्रणाली के तहत ई-साक्ष्य, न्यायश्रुति, ई-समन, ई-साइन और मेडलीप्र जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है, जिससे पुलिस, अभियोजन, कारागार और न्यायपालिका के बीच आपसी समन्वय बेहद तेज हो गया है।
एनसीएलआई डैशबोर्ड और तकनीकी विस्तार
बैठक के दौरान केवल सीसीटीएनएस तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि नेशनल क्राइम लिटिगेशन इन्फॉर्मेशन (NCLI) डैशबोर्ड की प्रगति का भी जायजा लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 तक उत्तराखंड ने एनसीएलआई डैशबोर्ड में 18वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि पिछली समीक्षा में राज्य 24वें स्थान पर था। इस तरह इस मोर्चे पर भी छह पायदान का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य योजना के तहत पुलिस, अभियोजन, कारागार और एफएसएल की कुल 242 साइटों को जोड़ा गया है, जिनमें 166 थाने और अन्य इकाइयां शामिल हैं। कनेक्टिविटी को निर्बाध बनाए रखने के लिए बीएसएनएल, एसडब्ल्यूएएन और लोकल वीपीएन का सहारा लिया जा रहा है, और अब तक 166 थानों में से 31 को अपग्रेड भी किया जा चुका है।
डेटा सुरक्षा और एफआईआर पर विशेष जोर
डिजिटल बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता को ताक पर न रखते हुए मुख्य सचिव ने आईटीडीए (ITDA) को एक अलग डेटा रिकवरी इकोसिस्टम तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भौगोलिक रूप से सुरक्षित रिकवरी व्यवस्था होने से महत्वपूर्ण डेटा की सुरक्षा हमेशा बनी रहेगी।
साथ ही, थानों में एफआईआर दर्ज करते वक्त आरोपियों या संबंधित व्यक्तियों का पूरा नाम, सही पता, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसे ब्योरे पूरी सटीकता के साथ भरने का नया मैकेनिज्म विकसित करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में ई-समन भेजने जैसी कानूनी प्रक्रियाएं बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सकें। आने वाले दो महीनों के भीतर सभी तय पैमानों पर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश के साथ ही नए सिस्टम के चयन की प्रक्रिया पर भी मंथन किया गया।









