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महज 60 हजार रुपये सालाना फीस पर होगी पढ़ाई, लेकिन छात्रों को पूरी करनी होगी यह बड़ी शर्त

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दून हॉराइज़न, देहरादून (18 सितंबर) : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) करने वाले डॉक्टरों के लिए दो साल की अनिवार्य सेवा का दायरा तय कर दिया गया है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है, जिसे दूर करने के लिए अब बॉंड प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

260 सीटों पर लागू होगा नया नियम

राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 260 सीटें उपलब्ध हैं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, इन सभी सीटों को अब नए बॉंड के दायरे में भरा जाएगा। प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों को दाखिले के समय ही दो साल का बॉंड भरना होगा, जिसके तहत कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें राज्य के भीतर ही अपनी सेवाएं देनी होंगी।

इस व्यवस्था के तहत छात्रों को केवल 60 हजार रुपये सालाना की मामूली फीस पर उच्च शिक्षा का लाभ मिलेगा। वर्तमान में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों के करीब पचास प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं, जिससे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चमोली के सिमली में बेस अस्पताल को लेकर गरमाई सियासत

दूसरी ओर, चमोली जिले के सिमली में महिला अस्पताल को बेस अस्पताल में उच्चीकृत न किए जाने से स्थानीय स्तर पर आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संघर्ष समिति ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासनादेश जारी नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने बताया कि इस मुद्दे पर आगामी रविवार को एक विशाल महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें कर्णप्रयाग, गैरसैण, थराली और नारायणबगड़ समेत दूरदराज के कई गांवों से लोग जुटेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में मशाल जुलूस निकालने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई है, और यदि मांग पूरी नहीं हुई तो सिमली से देहरादून मुख्यमंत्री आवास तक पद संचलन किया जाएगा।

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