दून हॉराइज़न, रुड़की (20 सितंबर) : देश के सबसे पुराने तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee) ने अपने दो दिवसीय वार्षिक दीक्षांत समारोह (Convocation) के अंतिम दिन शोध और नवाचार के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। रविवार को संपन्न हुए सत्र में कुल 1,424 स्नातकोत्तर, डॉक्टोरल और शोधार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि 518 पीएचडी उपाधियों का वितरण रही, जो संस्थान की स्थापना के बाद से किसी एक दीक्षांत समारोह में दी गई डॉक्टोरल उपाधियों की सर्वाधिक संख्या है।
हरिद्वार जिले के ऐतिहासिक रुड़की नगर में आयोजित इस शैक्षणिक समागम में देश के औद्योगिक और अकादमिक जगत के प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे। समारोह के मुख्य अतिथि हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्षवर्धन छिताले रहे, जबकि ऑयलमैक्स एनर्जी के संस्थापक डॉ. कपिल गर्ग ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की।
शोध में महिलाओं का दबदबा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जमीनी प्रयोग
समारोह के दौरान डॉक्टोरल वर्ग में लैंगिक विविधता का मजबूत प्रमाण देखने को मिला। कुल 518 पीएचडी उपाधिधारकों में से 172 महिला शोधार्थी थीं, जबकि छात्रों की संख्या 346 रही। संस्थान के निदेशक प्रो. के.के. पंत के मुताबिक, यह आंकड़ा संस्थान के शोध तंत्र की व्यापकता और महिला शोधकर्ताओं की बढ़ती अकादमिक भागीदारी को स्पष्ट करता है।
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के लचीले प्रावधानों का सीधा असर भी दिखा। संस्थान ने उन तीन शोधार्थियों को पहली बार ‘एमएस बाय रिसर्च’ (MS by Research) की उपाधि से नवाजा, जो किसी कारणवश अपने डॉक्टोरल शोध को पूरा किए बिना बीच में अकादमिक निकास का विकल्प चुन चुके थे। यह नीतिगत बदलाव उन छात्रों के बहुमूल्य शोध वर्षों को व्यर्थ होने से बचाता है।
स्नातकोत्तर संकाय में 903 उपाधियां, एमटेक में सर्वाधिक पंजीकरण
समारोह के दूसरे दिन बांटी गई 903 स्नातकोत्तर डिग्रियों में सबसे बड़ा हिस्सा इंजीनियरिंग संकाय का रहा। मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (एम.टेक.) में 579 छात्रों ने उपाधि हासिल की, जबकि मास्टर ऑफ साइंस (एम.एससी.) वर्ग में 174 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। इसके अलावा संस्थान ने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) में 77 और एग्जीक्यूटिव एमबीए में 29 पेशेवरों को उपाधियां बांटी।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने वीडियो संदेश के माध्यम से स्नातकों को प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि उपाधि प्राप्त करना ज्ञानार्जन का अंत नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और नई अकादमिक जिज्ञासाओं की औपचारिक शुरुआत है। दोनों दिनों के आंकड़े मिलाए जाएं तो स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी मिलाकर संस्थान ने इस सत्र में कुल 2,701 डिग्रियां वितरित की हैं, जो रुड़की के समूचे अकादमिक इतिहास का सबसे बड़ा बैच बन गया है।
उत्कृष्ट शोध और नवाचार के लिए 71 मेडल व पुरस्कार वितरित
शैक्षणिक और अनुसंधानात्मक उत्कृष्टता के लिए इस सत्र में कुल 71 पुरस्कार एवं 33 पदक वितरित किए गए। इनमें संस्थान द्वारा स्थापित पदकों के साथ-साथ पूर्व छात्रों और दानदाताओं द्वारा प्रायोजित सम्मान शामिल थे। पीएचडी स्तर पर भौतिकी विषय की शोधार्थी शिवानी चौधरी को प्रतिष्ठित ‘डॉ. सुशील शर्मा एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड’ से नवाजा गया। वहीं, जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के विद्यसागर तुम्माकुरी को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध के लिए ‘ए.के. गोयल ग्रीन एनर्जी प्राइज एंड गोल्ड मेडल’ प्रदान किया गया।
आर्किटेक्चर में गिएथ अल वराह, रसायन विज्ञान में अद्रिजा घोष, मैटेरियल्स इंजीनियरिंग में शैला मीर और बायोटेक्नोलॉजी में सौम्यदीप बसाक को भी डॉक्टोरल एक्सीलेंस सम्मान मिला। स्थानीय स्तर पर गंगा नहर के किनारे बसे इस 175 वर्ष से अधिक पुराने संस्थान की यह उपलब्धि उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में उच्च तकनीकी शोध की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सुदृढ़ करती है।









