दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : उत्तराखंड की सत्ताधारी पार्टी के भीतर सुलग रही गुटबाजी की आंच अब पूरी तरह से सड़क पर आ गई है। अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास के शासकीय आवास पर भाजपा (BJP) नेताओं के हालिया प्रदर्शन ने विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा सियासी हथियार थमा दिया है। राजपुर रोड से विधायक और समाज कल्याण मंत्री खजान दास के खिलाफ हुए इस अभूतपूर्व विरोध ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सीधे तौर पर विकासनगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान और उनकी पत्नी मधु चौहान को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह दंपति अपनी ही सरकार में काम कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। अपनी राजनीतिक नाकामियों का ठीकरा अब दूसरों के सिर फोड़ा जा रहा है।
चकराता में लगातार हार की खीज या प्रेशर पॉलिटिक्स?
चकराता-जौनसार क्षेत्र की राजनीति में कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रीतम सिंह का लंबे समय से दबदबा रहा है। असल में, इस अभेद्य दुर्ग को भेदने के लिए भाजपा ने मधु चौहान पर कई बार दांव खेला, लेकिन नतीजे सिफर रहे। गरिमा ने इसी सियासी इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि 2007, 2017 और फिर 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार मिली करारी शिकस्त ने चौहान दंपति की राजनीतिक पकड़ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालात पंचायत स्तर पर भी नहीं बदले। हालिया पंचायत चुनावों में मधु चौहान जिला पंचायत सदस्य का चुनाव तो जीत गईं, लेकिन अध्यक्ष पद की दौड़ में उन्हें कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सुखविंदर कौर से मात खानी पड़ी। जौनसार-बावर की कुल 11 जिला पंचायत सीटों में से 7 पर कांग्रेस का कब्जा है। केवल तीन सीटें भाजपा के खाते में आईं। दसौनी के अनुसार, इन्हीं झटकों की खीज अब मंत्री के खिलाफ धरने के रूप में बाहर आ रही है। जनता विकास चाहती है। नेताओं की आपसी लड़ाई नहीं।
मंत्री का ‘आत्महत्या’ वाला बयान और अनुशासन पर सवाल
इस पूरे विवाद का सबसे चिंताजनक पहलू कैबिनेट मंत्री का वह बयान है, जिसने सबको चौंका दिया। यह हैरान करने वाला है। पार्टी नेताओं के भारी दबाव और आरोपों का जवाब देते हुए खजान दास को सार्वजनिक रूप से यहां तक कहना पड़ गया कि यदि आरोप साबित हुए, तो वे इस्तीफा दे देंगे और आत्महत्या कर लेंगे।
दसौनी ने सीधे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से सवाल किया कि आखिर उनका वह बहुचर्चित अनुशासन कहां गायब हो गया है? कांग्रेस को नसीहत देने वाले खुद अपनी पार्टी का हाल देखें, जहां शिकायत निवारण के मंच होने के बावजूद मामले सड़क पर उछाले जा रहे हैं और एक कैबिनेट मंत्री को आत्महत्या तक की बात कहनी पड़ रही है। फिलहाल, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि बंद कमरों में लीपापोती करने या डैमेज कंट्रोल की बैठकों से अब काम नहीं चलेगा, क्योंकि भाजपा की अंदरूनी कलह का सच जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।









