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क्या राहुल के अजीत डोभाल वाले बयान से सहमत हैं हरीश रावत? भाजपा ने दागे तीखे सवाल

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दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर उत्तराखंड की सियासत पूरी तरह सुलग उठी है। पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी डोभाल को ‘उत्तराखंडियत’ और राज्य के स्वाभिमान से जोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के प्रांतीय नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।

देहरादून स्थित पार्टी के प्रांतीय मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने विपक्ष को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने हरीश रावत, गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और यशपाल आर्य जैसे वरिष्ठ नेताओं से दो टूक पूछा कि वे राहुल के इस बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। सवाल दागा गया कि क्या प्रांतीय कांग्रेस नेता मानते हैं कि देश का शीर्ष सुरक्षा अधिकारी उनके मोबाइल में बैठकर निगरानी कर रहा है?

80 की उम्र में भी सुरक्षा की धुरी, स्वर्णिम इतिहास का हवाला

भाजपा प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि 1968 बैच के केरल कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रहे अजीत डोभाल आज 80 वर्ष की उम्र में भी देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी बने हुए हैं।

जब राहुल गांधी स्कूली शिक्षा पूरी कर रहे थे, उस वक्त डोभाल पाकिस्तान और बांग्लादेश में गुप्त मिशनों को अंजाम दे रहे थे। आतंकवाद के दौर में स्वर्ण मंदिर में दाखिल होकर ऑपरेशन ब्लैक थंडर (Operation Black Thunder) की रूपरेखा तैयार करने में उनकी जांबाजी देश का इतिहास बन चुकी है। ऐसे राष्ट्रीय नायक पर स्तरहीन आक्षेप लगाना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है।

जनरल बिपिन रावत के अपमान की याद दिलाई

भाजपा ने याद दिलाया कि कांग्रेस नेताओं द्वारा उत्तराखंड के सैन्य और सुरक्षा नायकों को निशाना बनाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी।

सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने से लेकर सीमा सुरक्षा अभियानों पर सवाल उठाने तक, कांग्रेस का रुख हमेशा सुरक्षा तंत्र के मनोबल को गिराने वाला रहा है। 2014 के बाद से उत्तराखंड के मतदाताओं द्वारा लगातार नकारे जाने के कारण विपक्षी खेमा अब पूरी तरह बौखला चुका है।

चुनावी चौपालों तक ले जाएंगे मुद्दा

भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की मौजूदगी में यह भी साफ किया गया कि पार्टी इस विषय को महज प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रखेगी।

संगठन इस मुद्दे को जिले, ब्लॉक और बूथ स्तर तक लेकर जाएगा। प्रदेश के गौरवशाली सपूतों की गरिमा से खिलवाड़ को आगामी चुनावों में बड़ा जन-मुद्दा बनाया जाएगा, ताकि दिल्ली दरबार के आगे घुटने टेकने वाले स्थानीय विपक्षी नेताओं की चुप्पी का सच जनता तक पहुंच सके।

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