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उत्तराखंड : अस्पताल पहुंचे परिजनों के उड़े होश, मूक-बधिर नाबालिग निकली गर्भवती; पुलिस सुरक्षा में इलाज जारी

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दून हॉराइज़न, पिथौरागढ़ (25 सितंबर) : उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां बोलने में असमर्थ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रही एक नाबालिग किशोरी के गर्भवती होने की पुष्टि हुई है। परिजन उसे रूटीन इलाज समझकर अस्पताल लाए थे, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट सामने आते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

अस्पताल की जांच में खुला खौफनाक राज

मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित किशोरी मूक-बधिर (Hearing and Speech Impaired) है और उसे अक्सर मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। बीते 24 सितंबर को अचानक उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। अत्यधिक पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत पर परिजन घबराकर उसे सीधे पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय ले गए।

डॉक्टरों ने जब प्राथमिक जांच के बाद आवश्यक मेडिकल और अल्ट्रासाउंड टेस्ट किए, तो किशोरी के गर्भवती होने का पता चला। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में मौजूद परिजन गहरे सदमे में आ गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि बीमारी की आड़ में बच्ची के साथ इतना घिनौना कृत्य हुआ होगा।

पुलिस एक्शन: अस्पताल में सुरक्षा और जांच टीम गठित

अस्पताल प्रबंधन की आपात सूचना मिलते ही पिथौरागढ़ कोतवाली पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस अधिकारियों की एक टीम फौरन जिला अस्पताल पहुंची और ड्यूटी डॉक्टरों के साथ-साथ परिजनों से बंद कमरे में प्राथमिक बातचीत की।

पिथौरागढ़ के कोतवाल ललित मोहन जोशी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) बबीता टम्टा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। चूंकि पीड़िता विशेष रूप से सक्षम है और सदमे में है, इसलिए विशेषज्ञों व काउंसलर्स की मदद लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है ताकि कानूनी बयान दर्ज करने में आसानी हो।

जीरो एफआईआर और कानूनी प्रक्रिया

परिजनों के गहरे सदमे में होने के कारण कोतवाली में अभी तक कोई औपचारिक लिखित तहरीर नहीं दी गई है। हालांकि, कानूनन ऐसे मामलों में पुलिस शिकायत का इंतजार नहीं कर सकती। कोतवाल ललित मोहन जोशी ने स्पष्ट किया कि मामले में नियमानुसार तुरंत जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे जांच में कोई कानूनी अड़चन न आए।

सुरक्षा के लिहाज से पीड़िता को अस्पताल में ही 24 घंटे का पुलिस पहरा उपलब्ध कराया गया है। अज्ञात आरोपी की शिनाख्त के लिए पुलिस परिजनों की सामान्य दिनचर्या और हाल के दिनों में किशोरी के संपर्क में आए लोगों का ब्योरा जुटा रही है।

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