दून हॉराइज़न, देहरादून (26 सितम्बर) : उत्तराखंड के सरकारी, अशासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम के संचालन को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को एक विस्तृत पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि इस अभियान के बहाने शिक्षण संस्थानों का राजनीतिकरण करने की कोशिश की जा रही है।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब देहरादून के रायपुर ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा 22 सितम्बर 2026 को जारी एक सरकारी आदेश सार्वजनिक हुआ। पत्रांक संख्या विविध/1077-78/सेवा संकल्प अभियान/2026-27 के तहत स्कूलों को कथित तौर पर दिशा-निर्देश दिए गए थे।
शिक्षा विभाग के आदेश पर उठाए सवाल
धस्माना का आरोप है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस पखवाड़े की आड़ में सत्ताधारी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का अघोषित दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय मशीनरी का उपयोग करके स्कूलों के भीतर एक खास राजनीतिक विचारधारा का प्रचार किया जाना नियमों के खिलाफ है। स्कूलों की पहचान केवल ज्ञानार्जन और चरित्र निर्माण के केंद्र के रूप में रहनी चाहिए, न कि दलगत गतिविधियों के मंच के रूप में।
लेकिन विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस नेता ने मुख्य सचिव के सामने सात सूत्रीय मांगें रखकर तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
सात सूत्रीय मांग और जांच का दबाव
पत्र में स्पष्ट मांग की गई है कि प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजित हो रहे ऐसे सभी आयोजनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके अलावा सरकारी भवनों, परिसरों और संसाधनों के राजनीतिक इस्तेमाल पर पूर्ण पाबंदी लगाने के निर्देश जारी हों। छात्रों और शिक्षकों की किसी भी गैर-शैक्षणिक या राजनीतिक कार्यक्रम में बाध्यकारी भागीदारी को तुरंत खत्म करने को कहा गया है। यदि कहीं नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों व स्कूल प्रबंधनों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाए।
साथ ही यह भी मांग रखी गई है कि अभिभावकों और आम जनता के बीच भ्रम दूर करने के लिए शासन स्तर से स्पष्ट आचार-संहिता जारी कर पूरी वस्तुस्थिति सार्वजनिक की जाए।
सियासी असर और आगे की राह
अमूमन 17 सितंबर से अक्टूबर की शुरुआत तक चलने वाले इस तरह के सेवा पखवाड़ों में स्वच्छता, पौधारोपण और स्वास्थ्य शिविर जैसे सामाजिक कार्य आयोजित किए जाते हैं। हालांकि, सरकारी मशीनरी के कथित इस्तेमाल का आरोप लगते ही विपक्ष को राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का सीधा मौका मिल गया है। अब नजरें शासन पर टिकी हैं कि क्या शिक्षा महानिदेशालय इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण या नया दिशा-निर्देश जारी करता है।









