दून हॉराइज़न, देहरादून (29 सितंबर) : राजधानी की सड़कों पर कभी पाइपलाइन, कभी सीवर तो कभी बिजली-गैस की लाइनों के नाम पर होने वाली मनमानी खुदाई पर अब लगाम कसी गई है। नगर निगम देहरादून ने शहर में विकास कार्यों और आवश्यक नागरिक सेवाओं के नाम पर सड़कों को छलनी करने वाली एजेंसियों के लिए सख्त गाइडलाइंस लागू कर दी हैं।
आए दिन बिना किसी चेतावनी या सुरक्षा उपायों के खोदे जा रहे गड्ढों से शहरवासी लंबे समय से त्रस्त थे। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। आदेश साफ है—लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
मौके पर लगाना होगा बड़ा सूचना बोर्ड, अफसर का नंबर भी रहेगा दर्ज
देहरादून के राजपुर रोड, ईसी रोड, सहारनपुर रोड और क्लेमेंटाउन जैसे व्यस्त इलाकों से लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि किसी भी गली या मुख्य मार्ग पर खुदाई शुरू कर दी जाती है, लेकिन किसी को यह खबर नहीं होती कि काम कौन करा रहा है। नए नियम के तहत, अब खुदाई का फावड़ा चलने से पहले कार्यस्थल पर एक स्पष्ट और बड़े आकार का सूचना पट्ट (Signage Board) लगाना होगा।
इस बोर्ड पर कार्यदायी संस्था का नाम, प्रोजेक्ट की आधिकारिक मंजूरी, काम शुरू होने और पूरा होने की डेडलाइन स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। सबसे अहम बात यह कि संबंधित विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक रूप से अंकित करना होगा, ताकि स्थानीय नागरिक या पार्षद जरूरत पड़ने पर सीधे जवाबदेही तय कर सकें।
मिट्टी भरकर छोड़ना नहीं चलेगा, सड़क की मुकम्मल बहाली अनिवार्य
सड़क खोदने के बाद अक्सर ठेकेदार गड्ढों में सिर्फ कच्ची मिट्टी या रोड़ा पाटकर आगे बढ़ जाते हैं, जो पहली ही बारिश में धंसकर दलदल और हादसों का सबब बनता है। नगर निगम ने इस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब किसी भी एजेंसी को सड़क की मूल स्थिति में समयबद्ध पुनर्स्थापना (Road Restoration) करनी होगी, वह भी पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के तय इंजीनियरिंग मानकों के तहत।
केवल गड्ढा भरना काफी नहीं होगा, बल्कि निर्माण सामग्री और मलबे को भी वहां से पूरी तरह साफ करके ही अनापत्ति मिल सकेगी। अधिशासी अभियंता को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद मौके पर जाकर इन कार्यों की नियमित निगरानी करें।
रिफ्लेक्टर और सुरक्षित आवागमन बिना नहीं मिलेगी मंजूरी
नगर आयुक्त ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) को अनिवार्य शर्त बनाया है। रात के समय अंधेरे में खुदे गड्ढे जानलेवा साबित न हों, इसके लिए रेडियम रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और मजबूत बैरिकेडिंग लगानी होगी। पैदल चलने वालों के लिए अलग से सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था करनी होगी। यदि किसी कारणवश मुख्य रास्ता बाधित होता है, तो ट्रैफिक पुलिस के समन्वय से वैकल्पिक डायवर्जन प्लान भी कार्यदायी संस्था को ही तैयार करना होगा।
निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि जहां भी नियमों की अनदेखी दिखे, तुरंत निगम कंट्रोल रूम को सूचित करें ताकि लापरवाह एजेंसियों पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।









