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Weather Update : देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में मॉनसून की विदाई तय, 44 बंद सड़कों को खोलने में जुटा प्रशासन

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दून हॉराइज़न, देहरादून (01 अक्टूबर) : हिमालयी धामों में इस साल आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Disaster Management Authority) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस यात्रा सीजन में चारों धामों के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की कुल संख्या 54,09,725 पर पहुंच गई है।

बीते 24 घंटों में ही 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने विभिन्न धामों में हाजिरी लगाई। राहत की बात यह है कि पूरे प्रदेश में मौसम अब पूरी तरह करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ किया है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर उत्तराखंड से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूरी तरह विदा हो जाएगा।

धामों में जबरदस्त भीड़, केदारनाथ-बद्रीनाथ में रिकॉर्ड आमद

शारदीय नवरात्र और त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही तीर्थयात्रियों की संख्या में अचानक उछाल देखा जा रहा है। बद्रीनाथ धाम में अब तक सबसे अधिक 18,30,000 श्रद्धालु पहुंचे हैं, जबकि केदारनाथ धाम में 15,77,461 भक्त बाबा के दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री में 8.62 लाख और यमुनोत्री में 7.82 लाख से अधिक लोगों ने मत्था टेका।

सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुण्ड साहिब में भी श्रद्धालुओं का आंकड़ा 3.57 लाख पार कर गया है। इसके अलावा मानसखंड के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी आमद देखी जा रही है; नैनीताल स्थित कैंची धाम में इस साल 33.54 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे हैं, जबकि पूर्णागिरि में 24.64 लाख लोग दर्शन कर चुके हैं।

हालांकि, ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक ठंड बढ़ने और ऑक्सीजन की कमी के चलते स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं भी सामने आई हैं। यात्रा के दौरान अब तक विभिन्न कारणों से कुल 248 तीर्थयात्रियों की मृत्यु अथवा गुमशुदगी दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश मौतें पहले से मौजूद बीमारियों और दिल का दौरा पड़ने से हुईं।

5 अक्टूबर तक खुला रहेगा मौसम, विदाई के मुहाने पर मॉनसून

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के बुलेटिन के मुताबिक 1 से 5 अक्टूबर के बीच राज्य के लिए कोई चेतावनी (Weather Warning) जारी नहीं की गई है। अगले 72 घंटों में मॉनसून की औपचारिक विदाई तय मानी जा रही है। 2 से 4 अक्टूबर तक राज्य के सभी 13 जिलों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा, जिससे पर्वतीय मार्गों पर भूस्खलन का जोखिम लगभग न के बराबर हो गया है।

अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा भी शून्य दर्ज किया गया है। हालांकि, 6 और 7 अक्टूबर को पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते देहरादून, टिहरी, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ में हल्की से मध्यम बारिश का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

नदियों का जलस्तर सामान्य, 44 ग्रामीण सड़कों को खोलने की मशक्कत

पहाड़ों पर बारिश थमने से प्रमुख नदियों का उफान शांत है। हरिद्वार में गंगा नदी 291.25 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के स्तर (294.00 मीटर) से करीब पौने तीन मीटर नीचे है। उत्तरकाशी में भागीरथी का जलस्तर खतरे के निशान से 4.32 मीटर नीचे बना हुआ है। उधर, टिहरी बांध का जलस्तर 829.13 मीटर दर्ज किया गया, जहां से 9,975 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।

सड़क नेटवर्क की बात करें तो चारों धामों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-134, NH-34, NH-507) पूरी तरह सुचारू हैं। चमोली में सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाला जोशीमठ-मलारी-नीती मार्ग तमक नाला के पास 10 टन तक के हल्के व मध्यम वाहनों के लिए खोल दिया गया है। फिलहाल राज्य में 44 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें 34 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की ग्रामीण सड़कें हैं। लोनिवि और संबंधित एजेंसियां इन मार्गों से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने में जुटी हैं।

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