दून हॉराइज़न, देहरादून (01 अक्टूबर) : तकनीकी प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो पहाड़ के युवाओं के लिए सात समंदर पार के दरवाजे भी खुल जाते हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जिला कौशल विकास योजना (District Skill Development Plan) की समीक्षा बैठक में यह साबित हुआ, जहां जिले के 126 प्रशिक्षित युवाओं के वैश्विक स्तर पर चयन की आधिकारिक पुष्टि की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने प्रशासनिक अमले को दो टूक निर्देश दिए कि पुराने ढर्रे का प्रशिक्षण अब नहीं चलेगा। युवाओं को सीधे स्टार्टअप्स, रोबोटिक्स और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना होगा।
जापान, जर्मनी और खाड़ी देशों में दून के युवाओं का दबदबा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए प्लेसमेंट के आंकड़े बताते हैं कि विकसित देशों में भारतीय हुनर की मांग कितनी तेजी से बढ़ी है। जिला सेवायोजन अधिकारी के मुताबिक, हालिया विशेष भाषा और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बदौलत 126 युवाओं को प्रतिष्ठित विदेशी कंपनियों में तैनाती मिली है।
इनमें सबसे बड़ा हिस्सा जापान का रहा, जहां 75 युवाओं को जेरियाट्रिक और स्वास्थ्य देखभाल (Caregiver) के क्षेत्र में नियुक्ति पत्र मिले हैं। इसके अलावा जर्मनी के स्वास्थ्य ढांचे में 1 युवा को नर्सिंग पद पर और सऊदी अरब के बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों में वेयरहाउस प्रबंधन के लिए 30 युवाओं को चयनित किया गया।
और यह सिलसिला यहीं नहीं थमेगा। आने वाले महीनों में हेल्थकेयर सेक्टर के साथ-साथ आईटी सपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी में भी विदेशी नियुक्तियों के लिए नए बैच शुरू किए जाने की तैयारी है।
सिडकुल की मांग के हिसाब से बदलेगा ITI का ढांचा
जिलाधिकारी ने साफ किया कि कौशल विकास केवल कागजों तक सीमित न रहे। इसके लिए राज्य औद्योगिक विकास निगम (SIDCUL) और उद्योग विभाग के साथ हर महीने संयुक्त कार्यशालाएं होंगी।
जिले के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में दशकों से चल रहे कई पुराने ट्रेड आज के दौर में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। लिहाजा, इन पाठ्यक्रमों की तत्काल समीक्षा होगी और कंपनियों की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से नए तकनीकी कोर्स जोड़े जाएंगे।
पीएम सेतु योजना से अपग्रेड होंगी लैब्स
तकनीकी संस्थानों में आधुनिक मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार की ‘पीएम सेतु योजना’ का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत देहरादून स्थित सरकारी आईटीआई और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) की पुरानी वर्कशॉप्स को हाई-टेक किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि जब छात्र सीधे उन मशीनों पर काम सीखेंगे जो आज की फैक्ट्रियों में चल रही हैं, तो उनके रोजगार की राह बेहद आसान हो जाएगी। इस समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला सेवायोजन अधिकारी ममता और उद्योग संघ के प्रतिनिधि अरुण नैथानी समेत कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।









