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Ankita Bhandari Case : कांग्रेस के आरोपों पर भड़की भाजपा, कहा – माता-पिता की आशंकाओं और मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई

अंकिता भंडारी केस में भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने परिजनों की मांग पर सीबीआई जांच, उम्रकैद और 25 लाख की मदद का ब्योरा दिया।

देहरादून (14 अक्टूबर) : उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Case) को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के हमलों के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा पेश कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने देहरादून में आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए न केवल उनके कहने पर सरकारी वकील बदले, बल्कि परिजनों की मांग पर ही सीबीआई जांच की औपचारिक प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया है।

भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक द्वेष और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि सरकार ने प्रभावी अभियोजन से लेकर आर्थिक संबल देने तक अपनी संवैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई है।

परिजनों की मांग पर सीबीआई जांच और वकील बदले

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही अंकिता के माता-पिता की आशंकाओं और मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब परिजनों ने अदालत में प्रभावी पैरवी को लेकर अपनी अपेक्षाएं रखीं, तो शासन ने उनकी संतुष्टि के लिए तत्काल सरकारी अधिवक्ताओं में बदलाव किया।

इसके साथ ही, जब अंकिता के परिजनों ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग उठाई, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए सीबीआई जांच की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया। भट्ट के अनुसार, संवेदनशील मामलों में सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकता निभाना काफी नहीं होता, बल्कि पीड़ित परिवार का न्याय प्रणाली पर अटूट भरोसा बनाए रखना सबसे अहम जवाबदेही है।

विपक्ष के आरोपों पर भाजपा का तीखा पलटवार

कांग्रेस द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि विपक्ष इस दुखद घटना पर केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया था।

इसके तुरंत बाद पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसने बिना किसी दबाव के वैज्ञानिक साक्ष्य, तकनीकी डेटा और करीब 100 गवाहों के बयान दर्ज कर अदालत में 500 पन्नों का पुख्ता आरोपपत्र दाखिल किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने साफ किया कि धामी सरकार महिलाओं के विरुद्ध किसी भी अपराध पर कड़ा रुख रखती है और रसूखदारों को बचाने का विपक्ष का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है।

उम्रकैद, गैंगस्टर एक्ट और परिवार को मिली आर्थिक सहायता

अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी और एसआईटी द्वारा जुटाए गए अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मामले के दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा, अपराधियों के संगठित नेटवर्क और गैरकानूनी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई। भट्ट ने बताया कि कानूनी लड़ाई के साथ-साथ बेटी खो चुके परिवार को सामाजिक व आर्थिक संबल देने के लिए प्रदेश सरकार ने ₹25 लाख की आर्थिक सहायता सीधे उपलब्ध कराई।

साथ ही परिवार के भरण-पोषण के लिए रोजगार की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने दोहराया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल एक सामान्य कानूनी मुकदमा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी के सम्मान, सुरक्षा और कानून के राज से जुड़ा विषय है।

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