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उत्तराखंड पुलिस का दावा, अंकिता मर्डर केस में नहीं बरती लापरवाही; जेल की सलाखों के पीछे हैं तीनों दोषी

अंकिता भंडारी हत्याकांड में एडीजी वी. मुरुगेशन ने स्थिति स्पष्ट की। एसआईटी की 500 पन्नों की चार्जशीट और मजबूत पैरवी से तीनों दोषी आजीवन कारावास काट रहे हैं।

देहरादून (15 अक्टूबर) : उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उपजी तमाम चर्चाओं और भ्रांतियों पर पुलिस मुख्यालय ने विराम लगा दिया है। अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को विशेष प्रेस वार्ता बुलाकर साफ किया कि अंकिता के तीनों कातिल सलाखों के पीछे आजीवन कठोर कारावास की सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना सामने आने के महज 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को दबोच लिया गया था और सरकार की त्वरित पैरवी के चलते अदालत ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

जेल में आजीवन कारावास काट रहे तीनों दोषी

एडीजी मुरुगेशन ने पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में सितंबर 2022 में हुई इस दुखद वारदात में पुलिस ने शुरू से ही सख्त रुख अपनाया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, उसके साथी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वर्तमान में तीनों मुजरिम जेल में बंद हैं और अदालत द्वारा मुकर्रर की गई आजीवन कठोर कारावास की सजा काट रहे हैं। पुलिस ने साफ किया कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी स्तर पर कोई नरमी नहीं बरती गई और कानून के दायरे में दोषियों को उनके मुकाम तक पहुंचाया गया है।

अटूट डिजिटल साक्ष्य और 500 पन्नों की चार्जशीट

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच टीम ने घटनास्थल से इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक और जमीनी साक्ष्यों को बेहद बारीकी से जुटाया। गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक रिपोर्टों का गहन विश्लेषण करते हुए एसआईटी ने रिकॉर्ड 88 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी की और अदालत में लगभग 500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। इसी पुख्ता कानूनी घेराबंदी के चलते बचाव पक्ष अदालत में कोई तकनीकी फायदा नहीं उठा सका।

कोटद्वार कोर्ट से मिली आजीवन कठोर कारावास की सजा

एडीजी ने न्यायिक प्रक्रिया का पूरा ब्योरा देते हुए बताया कि शासन के निर्देश पर अभियोजन पक्ष ने कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में इस मुकदमे की लगातार मजबूत पैरवी की। एसआईटी के अकाट्य सबूतों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने 30 मई 2025 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीनों अभियुक्तों को हत्या और षड्यंत्र का दोषी करार दिया था।

कोर्ट ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंतिम सांस तक जेल में रहने यानी आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। पुलिस अधिकारियों ने दोहराया कि राज्य में बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

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