अंकिता भंडारी केस पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कांग्रेस को घेरा। दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को इस केस से जोड़ने को दलित विरोधी और असंवैधानिक करार दिया।
देहरादून (15 अक्टूबर) : उत्तराखंड की दिवंगत बेटी अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विपक्ष के सियासी अभियान पर राज्य सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अंकिता के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है और दिल्ली से लेकर देहरादून तक केवल सुर्खियां बटोरने के लिए धरने दे रही है।
मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है। इस संवैधानिक नियुक्ति को अंकिता प्रकरण से जोड़कर बदनाम करना कांग्रेस की संकीर्ण और दलित विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर राजनीति दलित विरोधी
मीडिया से बातचीत में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सवाल उठाया कि सामाजिक न्याय और दलितों के उत्थान की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह संवैधानिक पदों पर होने वाली नियुक्तियों के प्रति क्या नजरिया रखती है। उन्होंने कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता के लंबे योगदान और पहचान को केवल मनगढ़ंत राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं आंका जा सकता।
कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए हर मर्यादा लांघ रही है। यदि विपक्ष के पास अपने दावों को लेकर रत्ती भर भी कोई ठोस साक्ष्य है, तो वह मंचों पर झूठी बयानबाजी करने के बजाय सीधे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष पेश करे।
कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम पर क्यों मौन राहुल
विपक्षी दल के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कैबिनेट मंत्री ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने पूछा कि जब कांग्रेस के अपने सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर जेएनयू की छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए जाने और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं, तब कांग्रेस के बड़े नेताओं की आवाज कहां गायब हो गई थी? ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली प्रियंका गांधी और महिलाओं के अधिकारों पर भाषण देने वाले राहुल गांधी अपने ही सांसद पर लगे गंभीर आरोपों पर मुंह क्यों सिले बैठे हैं? उन्होंने कहा कि महिला सम्मान का पैमाना राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर तय नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट से जमानत खारिज और नर्सिंग कॉलेज नामकरण
धामी सरकार की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा देते हुए रेखा आर्या ने याद दिलाया कि घटना के 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को जेल भेजा गया, महिला डीआईजी की अगुवाई में एसआईटी बनी और गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। 500 पन्नों की चार्जशीट और 100 से अधिक गवाहों के दम पर अदालत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
19 अगस्त को उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा भी दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। सरकार ने परिजनों की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले, सीबीआई जांच की सिफारिश की, 25 लाख रुपये की सहायता दी और अंकिता के पिता व भाई को सरकारी नौकरी प्रदान की। इसके अलावा, अंकिता की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए डोभ स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम ‘स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज’ कर दिया गया है।









