देहरादून के नामी निजी स्कूलों द्वारा सरकारी बस किराये को एकतरफा बताकर दोगुना वसूलने का खुलासा। हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने सीईओ से जांच व कार्रवाई की मांग की।
देहरादून (15 अक्टूबर) : राजधानी देहरादून के नामी निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब काटने का एक नया खेल सामने आया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में निजी स्कूलों की मनमानी फीस और स्कूल बस किराये के खिलाफ जनहित याचिका (PIL No. 161) दायर करने वाले अधिवक्ता जसविंदर सिंह ने बड़ा खुलासा किया है।
शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूल शासन और परिवहन आयुक्त द्वारा तय स्कूल बस किराये को केवल ‘एक तरफ’ (One-Way) का बताकर अभिभावकों से सीधे दोगुना किराया वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं, स्कूलों द्वारा अभिभावकों को ईमेल भेजकर पुराना कथित बकाया तत्काल जमा करने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
सरकारी दर को एकतरफा बताकर दोगुना किराया वसूली
अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब मामले की पड़ताल की गई, तो स्कूलों की इस चालाकी का पर्दाफाश हुआ। अधिवक्ता जसविंदर सिंह ने 5 अक्टूबर 2026 को परिवहन आयुक्त कार्यालय से इस संबंध में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कराई। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए 18 अप्रैल 2026 के अधिकृत शासनादेश में साफ तौर पर दर्ज है कि परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित किराया स्लैब छात्र-छात्राओं के घर से स्कूल आने और वापस घर जाने (To and From), यानी दोनों तरफ की यात्रा के लिए मान्य है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन नियमों को तोड़-मरोड़ कर अभिभावकों से एक तरफ का किराया समझकर दोहरा शुल्क वसूल रहे हैं।
परिवहन आयुक्त के आदेश में दोनों तरफ का किराया
निजी स्कूलों की इस आर्थिक मनमानी से त्रस्त अभिभावकों ने जब स्कूल प्रशासनों से सवाल किया, तो उन्हें नियमों का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश की गई। अभिभावकों को भेजे जा रहे नोटिस और ईमेल में यह दावा किया गया कि सरकारी दरें केवल स्कूल छोड़ने की हैं, लाने का खर्च अतिरिक्त होगा। यह सीधा-सीधा अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी और कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना है।
अधिवक्ता जसविंदर सिंह ने कहा कि शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जब परिवहन आयुक्त का आदेश पूरी तरह पारदर्शी है, तो स्कूल प्रबंधन अपनी मनगढ़ंत व्याख्या थोपकर परिवारों पर बेवजह का आर्थिक बोझ नहीं डाल सकते।
मुख्य शिक्षा अधिकारी से जांच और कार्रवाई की मांग
इस पूरे फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद अब विधिक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। अधिवक्ता जसविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) देहरादून और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखकर दोषी स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और ऑडिट की मांग करेंगे।
उन्होंने दून के सभी अभिभावकों से निर्भीक होने की अपील की है कि वे बच्चों के साथ स्कूल में दुर्व्यवहार की आशंका के डर से चुप न बैठें। अभिभावक ऐसे सभी मांग पत्रों, ईमेल और फीस रसीदों के प्रमाण सुरक्षित रखकर सीईओ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, निर्धारित किराया-स्लैब को जनहित में और कम कराने के लिए न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
(अस्वीकरण: यह खबर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता जसविंदर सिंह द्वारा दी गई जानकारी, अभिभावकों की शिकायतों और परिवहन विभाग के अधिकृत आदेशों पर आधारित है। ‘दून हॉराइज़न’ का उद्देश्य केवल जनहित से जुड़े मुद्दों और नियमों की जानकारी पाठकों तक पहुंचाना है, किसी भी शिक्षण संस्थान की छवि धूमिल करना नहीं। यदि इस विषय पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहेगा, तो उसे भी पूरी प्रमुखता के साथ स्थान दिया जाएगा।)









