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Dehradun Elevated Road : दून में 1200 लोगों पर बेघर होने का खतरा, सड़कों पर उतरे परिवार

देहरादून में मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड के नए अलाइनमेंट से 300 घरों पर संकट। विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे लोग, 23 अक्टूबर को SLO के समक्ष होगी सुनवाई।

देहरादून (15 अक्टूबर) : राजधानी देहरादून को जाममुक्त करने के नाम पर तैयार मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक टकराव खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अचानक बदले गए अलाइनमेंट के चलते मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर के बीच 300 से अधिक रिहायशी मकानों पर बुलडोजर चलने का खतरा मंडरा रहा है।

छिनते आशियानों और रोजी-रोटी के संकट को लेकर 1,200 से ज्यादा प्रभावित नागरिकों ने 14 अक्टूबर से देहरादून विधानसभा के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रभावितों का सबसे तीखा सवाल सरकारी सिस्टम पर है—यदि यह रूट पहले से तय था, तो नगर निगम ने दशकों से इन जमीनों के नक्शे क्यों पास किए और प्रशासन ने रजिस्ट्रियां क्यों होने दीं?

विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे बारह सौ लोग

मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे प्रभावित परिवारों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जीवनभर की पूंजी से बनाए गए घरों को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देंगे। बुजुर्गों और महिलाओं समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विधानसभा के गेट पर डटे हुए हैं।

संघर्ष समिति के संयोजक सुशील कुमार और स्थानीय निवासी त्रिलोक सिंह नेगी का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व जनसुनवाई या नोटिस के सीधे लोगों की दीवारों पर लाल निशान लगाने शुरू कर दिए, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। प्रदर्शनकारियों ने सीधी चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनहित की अनदेखी की, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक कूच करेंगे।

नक्शे पास हुए तो अब आशियानों पर संकट क्यों

प्रभावित क्षेत्र के निवासियों का तर्क है कि वे सड़क निर्माण या शहर के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अलाइनमेंट का जो खेल खेला गया है, उसने मध्यमवर्गीय परिवारों को सड़क पर ला खड़ा किया है। शुरुआत में इस एलिवेटेड सड़क को मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (हरिद्वार रोड) के ऊपर से ले जाने का प्रस्ताव था, जिसे बाद में गुपचुप तरीके से बदलकर रेलवे लाइन के समानांतर घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में डाल दिया गया।

स्थानीय निवासी पारितोष भटनागर और उषा पंवार ने सवाल उठाया कि जब दर्जनों परिवारों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर नगर निगम से विधिवत नक्शे पास कराकर पक्के मकान बनाए और टैक्स भरते रहे, तो अब अचानक उन्हें अवैध या बाधा बताकर उजाड़ना कहां का न्याय है?

23 अक्टूबर को भूमि अध्याप्ति अधिकारी के समक्ष सुनवाई

दूसरी ओर, एनएचएआई के अधिकारी सौरभ सिंह का कहना है कि प्रिंस चौक से जोगीवाला के बीच पुराने हाईवे पर दोनों तरफ भारी व्यावसायिक इमारतें होने के कारण चौड़ीकरण बेहद जटिल था, इसलिए रेलवे ट्रैक के पास उपलब्ध जमीन पर नया रूट चुना गया ताकि कम से कम नुकसान हो। विभाग के अनुसार, अभी केवल प्रभावित संपत्ति का दायरा तय करने के लिए सर्वे और मार्किंग की जा रही है, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) के माध्यम से मुकम्मल मुआवजे का निर्धारण होगा।

इस बीच, प्रभावित परिवारों की आपत्तियों पर पहली औपचारिक प्रशासनिक सुनवाई 23 अक्टूबर को एसएलओ कार्यालय में नियत की गई है, जहां स्थानीय लोग पुराने रूट या मोथरोवाला-बंजारावाला-दुधली जैसे वैकल्पिक रास्तों पर सड़क बनाने की मांग रखेंगे।

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