उत्तराखंड में 23 अक्टूबर से ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच शुरू होगी। 12 नवंबर से मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।
देहरादून (22 अक्टूबर) : उत्तराखंड में आगामी चुनावी तैयारियों और प्रशासनिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित अहम बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को चुनावी प्रक्रियाओं के रोडमैप से अवगत कराया गया। राज्य में 23 अक्टूबर से ईवीएम मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच यानी एफएलसी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इसके साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए आगामी 12 नवंबर से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान का भी ऐलान किया गया है।
23 अक्टूबर से शुरू होगी ईवीएम मशीनों की जांच
निर्वाचन आयोग के तय शेड्यूल के मुताबिक, राज्य के सभी जनपदों में 23 अक्टूबर से ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है, ताकि मशीनों की कार्यप्रणाली को लेकर किसी भी तरह का संशय न रहे। प्रशासनिक स्तर पर इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है क्योंकि आगामी चुनावों की तैयारियों का यह एक शुरुआती और अहम पड़ाव है।
एक हफ्ते में मिले एक लाख से ज्यादा आवेदन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक के दौरान पिछले दिनों चले विशेष अभियान के आंकड़ों का भी खुलासा किया। प्रदेश में 12 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच चलाए गए अभियान के दौरान कुल 1,00,744 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि युवाओं में मतदाता बनने को लेकर खासा उत्साह है। वे नागरिक जो 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे इस प्रक्रिया के तहत अपने नाम जुड़वाने के लिए पात्र माने गए हैं। प्रशासन अब इन आवेदनों के सत्यापन और आगामी पुनरीक्षण कार्य की तैयारियों में जुट गया है।
4 जनवरी 2027 को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
प्रशासनिक कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे, जिनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगामी 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। साथ ही, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आक्षेपकर्ता अधिकतम 10 फॉर्म-7 और सतत अद्यतन अवधि के दौरान प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन ही प्रस्तुत कर सकेगा। बैठक में विभिन्न दलों के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।









