देहरादून में 19 लाख रुपये की लागत से बने हाईटेक सेंटर के जरिए उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों के दिव्यांग विद्यार्थियों को सिविल सेवा की निःशुल्क कोचिंग मिल रही है।
देहरादून (22 अक्टूबर) : उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम गांवों में बैठकर प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अब भौगोलिक दूरी और संसाधनों की कमी रुकावट नहीं बन रही है। राजधानी देहरादून में समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के संयुक्त प्रयास से संचालित 19 लाख रुपये की लागत वाला हाईटेक कोचिंग सेंटर इन युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद शुरू की गई इस अनूठी पहल से गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक के दिव्यांग अभ्यर्थी घर बैठे आईएएस और पीसीएस जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
हाईटेक तकनीक से दूर हुई पहाड़ों की दूरी
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि विद्यार्थियों को कोचिंग के लिए हर बार देहरादून आने की जरूरत नहीं पड़ती है। राजपुर रोड स्थित संस्थान में स्थापित इस आधुनिक केंद्र में हर दिन शाम चार से सात बजे तक ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जाती हैं। गूगल मीट और साइन लैंग्वेज के प्रभावी इस्तेमाल से पढ़ाई को बेहद आसान बनाया गया है।
इस सेंटर में वीडियो मिक्सर, कॉर्डलेस माइक्रोफोन, 75 इंच की बड़ी स्क्रीन, तीन कंप्यूटर कंसोल, थिएटर लाइट और हाईटेक कैमरे जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे सुदूर इलाकों में बैठे छात्र भी सीधे शिक्षकों से जुड़ रहे हैं।
बैंकिंग और एसएससी परीक्षाओं तक बढ़ेगा दायरा
समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत शुरू की गई इस निःशुल्क कोचिंग का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में छात्रों को सामान्य अध्ययन, सीसैट, तार्किक क्षमता और गणित की विशेष तैयारी कराई जा रही है। युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए आने वाले दिनों में बैंक और कर्मचारी चयन आयोग यानी एसएससी की परीक्षाओं की भी निःशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिल सके।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे पहाड़ी युवा
देहरादून से चयनित दिव्यांग छात्र मोहन दास ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल ने दूरदराज के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का बड़ा काम किया है। प्रशासनिक स्तर पर की गई यह व्यवस्था साबित करती है कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति और सही संसाधन मिल जाएं, तो कोई भी शारीरिक चुनौती सपनों के आड़े नहीं आती। यह सेंटर न सिर्फ युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि उन्हें समाज में आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन जीने का हौसला भी दे रहा है।









