केदारनाथ धाम में मोरारी बापू की मानस भारत स्वस्तिक यात्रा का पहला चरण संपन्न हुआ। जानिए यात्रा के अगले चरण और इसके खास संदेश के बारे में।
केदारनाथ (24 अक्टूबर) : केदारनाथ धाम में आध्यात्मिकता और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला है। केरल के कालडी से शुरू हुई ‘मानस भारत स्वस्तिक यात्रा-1’ का पहला चरण 23 अक्टूबर को केदारनाथ धाम में विधि-विधान के साथ संपन्न हो गया। इस 14 दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के समापन अवसर पर प्रसिद्ध संत मोरारी बापू ने आदि शंकराचार्य के योगदान को याद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन देश को वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करते हैं। इस पूरी यात्रा का मुख्य केंद्र आदि शंकराचार्य की परंपरा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़ा रहा है।
केदारनाथ धाम में संपन्न हुआ पहला चरण
केदारनाथ धाम में यात्रा के विराम दिवस पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि यह यात्रा भारत को आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास मात्र है। उन्होंने यात्रा के सफल समापन का पूरा श्रेय भगवान केदारेश्वर की असीम कृपा को दिया। बापू ने यमुनोत्री, गंगोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ को शंकराचार्य से जुड़ी चार धाम परंपरा का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि ये तीर्थस्थल ही भारत की असली आध्यात्मिक एकता के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दुर्गम स्थानों पर व्यासपीठ की यात्रा के दौरान किसी अदृश्य चेतना का अहसास होता है, जिसके बल पर कारवां आगे बढ़ता है।
स्वस्तिक को बताया राष्ट्र जोड़ने का माध्यम
आदि शंकराचार्य के ऐतिहासिक कार्यों का स्मरण करते हुए बापू ने कहा कि उन्होंने देश के कोने-कोने को आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने का अलौकिक कार्य किया था। स्वस्तिक को ‘ओम’ का साकार पर्याय बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा राष्ट्र और विश्वभर में शांति और सद्भाव का संदेश फैला रही है। इस पूरी आध्यात्मिक यात्रा से चार मुख्य वस्तुएं यानी भिक्षा, भजन, समाधि और सामवेद का संदेश मिलता है। रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के जरिए सत्य, प्रेम और करुणा की सीख देते हुए उन्होंने इस यात्रा का पूरा पुण्य और सुफल आदि शंकराचार्य के चरणों में समर्पित किया।
14 नवंबर से द्वारका से होगी शुरुआत
केदारनाथ में पहला चरण पूरा होने के बाद अब आयोजन समिति अगले पड़ाव की तैयारियों में जुट गई है। मानस भारत स्वस्तिक यात्रा का दूसरा चरण आगामी 14 नवंबर को गुजरात के द्वारका से शुरू किया जाएगा। यह चरण आगे बढ़ते हुए 22 नवंबर को पुरी में विश्राम लेगा। इस पूरी यात्रा का सीधा प्रसारण आस्था टीवी चैनल और चित्रकूटधाम तलगाजरडा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा।
आयोजकों ने बताया कि पहले दिन का प्रसारण शाम चार बजे से शुरू होगा, जबकि बाकी दिनों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल समय तय किया जाएगा। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से देश के दूर-दराज के इलाकों में धार्मिक चेतना को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।









