पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2027 विधानसभा चुनाव में खानपुर सीट से ताल ठोकने की इच्छा जताई है। हल्द्वानी में परिवारवाद पर भी उन्होंने खुलकर जवाब दिया।
हल्द्वानी (27 अक्टूबर) : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए हरिद्वार जिले की चर्चित खानपुर सीट से चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा जताकर सूबे की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हल्द्वानी दौरे पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ किया कि स्थानीय जनता के दबाव के चलते वह खानपुर से उतरना चाहते हैं, हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार पर लगने वाले परिवारवाद के आरोपों पर भी कड़ा पलटवार किया।
खानपुर सीट से चुनावी ताल ठोकने का बनाया मन
हल्द्वानी में मीडिया से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने कहा कि खानपुर क्षेत्र के लोग और कार्यकर्ता उनसे लगातार चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं की इसी मांग के चलते उन्होंने इस बार खानपुर सीट से अपनी दावेदारी का मन बनाया है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद भाजपा को सत्ता से बाहर करना है और इसके लिए जो भी जिताऊ चेहरा होगा, पूरी पार्टी एकजुट होकर उसके साथ खड़ी होगी। हालांकि, उन्होंने पार्टी अनुशासन का हवाला देते हुए यह भी जोड़ा कि अंतिम मुहर कांग्रेस नेतृत्व ही लगाएगा और संगठन जहां से आदेश देगा, वे वहीं से मैदान में जाएंगे।
परिवारवाद के तीखे आरोपों पर खुलकर दिया सीधा जवाब
टिकट बंटवारे और परिजनों की सक्रियता पर उठने वाले परिवारवाद के सवालों का हरीश रावत ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके परिवार पर उंगली उठाते हैं, उन्हें यह जमीनी हकीकत भी देखनी चाहिए कि उनके परिवार के सदस्य पिछले 20 से 25 सालों से लगातार जनता के बीच रहकर पसीना बहा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि जनता के बीच रहकर संघर्ष करना और पार्टी का काम संभालना परिवारवाद के दायरे में नहीं आता, बल्कि यह जनसेवा और संगठन के प्रति निष्ठा का सबूत है।
खानपुर का सियासी गणित और कांग्रेस नेतृत्व की चुनौती
हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट सियासी तौर पर बेहद संवेदनशील मानी जाती है, जहां फिलहाल निर्दलीय विधायक उमेश कुमार का कब्जा है और इससे पहले यह सीट लंबे समय तक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का गढ़ रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में नैनीताल जिले की लालकुआं सीट से हार का सामना कर चुके हरीश रावत के लिए खानपुर में कदम रखना बड़ा सियासी जोखिम भी साबित हो सकता है। अब पूरी नजर कांग्रेस हाईकमान पर टिकी है कि वह 2027 के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री के इस नए सियासी समीकरण को हरी झंडी देता है या कोई और रणनीति अपनाता है।









