जोशीमठ में बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर क्रैश। मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद उड़ान पर सवाल। 6 लोग सवार थे, प्रशासन और डीजीसीए ने जांच शुरू की।
चमोली/देहरादून (30 अक्टूबर) : उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के समापन से ठीक पहले चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में एक बड़ा हवाई हादसा हो गया है। बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर लौट रहा एक निजी एविएशन कंपनी का हेलीकॉप्टर उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद रडार से गायब हुआ और फिर गहरी घाटी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान में पायलट समेत छह लोग सवार थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, इस हादसे ने नागरिक उड्डयन और स्थानीय एयर ट्रैफिक कंट्रोल के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, क्योंकि मौसम विभाग की ओर से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़, बारिश और बिजली गिरने का स्पष्ट अलर्ट जारी होने के बावजूद इस चॉपर को उड़ान भरने की मंजूरी दे दी गई थी।
मौसम के अलर्ट पर उड़ान की मंजूरी किसने दी?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल हेलीकॉप्टर संचालन के प्रोटोकॉल पर उठ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 अक्टूबर को ही बुलेटिन जारी कर 30 अक्टूबर के लिए चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछार की चेतावनी दी थी। घाटी में दृश्यता कम होने के कारण अन्य कई निजी ऑपरेटरों ने अपनी सेवाएं पहले ही बंद कर दी थीं। इसके बावजूद यह हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर बदरीनाथ हेलीपैड से रवाना कैसे हुआ? क्या पायलट पर उड़ान का कोई व्यावसायिक दबाव था या ग्राउंड क्लीयरेंस देने वाले अधिकारियों ने मौसम के रडार को अनदेखा किया? इस बाबत आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि हादसा अभी हुआ है और तथ्यात्मक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा।
साल 2025 के हादसों से नहीं सीखा सबक
यह हादसा इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि साल 2026 का पूरा यात्रा सीजन अब तक पूरी तरह शून्य दुर्घटना वाला रहा था। इससे पहले 2025 का साल उत्तराखंड में एविएशन सुरक्षा के लिए बेहद भयावह साबित हुआ था, जब 5 अलग-अलग घटनाओं में 13 लोगों की जान चली गई थी। 8 मई 2025 को गंगनानी में बेल-407 क्रैश होकर खाई में गिरा था, जिसमें 6 मौतें हुई थीं। वहीं 15 जून 2025 को केदारनाथ-गौरीकुंड के बीच आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर क्रैश होने से एक बच्चे समेत 7 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी।
उस समय डीजीसीए (DGCA) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने पहाड़ी घाटियों में उड़ान के लिए बेहद कड़े नियम बनाए थे। पायलटों के अनुभव, विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) और मौसम की लाइव मॉनिटरिंग अनिवार्य की गई थी। अब सवाल यह है कि यात्रा के अंतिम हफ्ते में उन सभी सुरक्षा नियमों को ताक पर क्यों रख दिया गया?
डीजीसीए और यूकाडा ने शुरू की सख्त जांच
घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय चमोली पुलिस की टीमें दुर्गम पहाड़ी इलाके में राहत और बचाव के लिए रवाना हो गईं। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की तकनीकी टीम को ब्लैक बॉक्स और एटीसी वॉयस रिकॉर्ड की पड़ताल के लिए भेजा जा रहा है।
प्रशासनिक हलकों से आ रहे संकेतों के मुताबिक, चारधाम के सभी हेलीपैड्स पर मौसम की सख्त समीक्षा होने तक उड़ानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के दिन नजदीक हैं, ऐसे में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।









