उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तारी से राहत नहीं दी। 210 करोड़ के आरोप के बीच 3 नवंबर को अगली सुनवाई।
नैनीताल (30 अक्टूबर) : उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या पर 210 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले उनके पति गिरधारी लाल साहू को नैनीताल हाईकोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। शुक्रवार को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई भी सुरक्षात्मक आदेश देने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से 3 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद देहरादून पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी की धरपकड़ के लिए दबिश तेज कर दी है।
गिरफ्तारी से राहत नहीं, 210 करोड़ का दांव फेल
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गिरधारी लाल साहू के पक्ष ने दलील दी कि उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। याचिका में कहा गया कि दोनों का विवाह साल 2004 में हुआ था और 22 वर्षों के वैवाहिक जीवन में कभी कोई विवाद नहीं रहा। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद उन्होंने कथित रूप से 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। साहू का आरोप है कि जब उन्होंने इस कथित भ्रष्टाचार का विरोध किया, तो राजनीतिक प्रभाव के चलते उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा दी गई।
उन्होंने कोर्ट से इस कथित संपत्ति की उच्च स्तरीय जांच कराने और अपनी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, एकलपीठ ने दावों के बावजूद गिरफ्तारी पर रोक लगाने जैसी कोई अंतरिम राहत नहीं दी और अगली सुनवाई 3 नवंबर तय कर दी।
फर्जी दस्तखत और धमकी, जानिए विवाद की वजह
यह हाई-प्रोफाइल विवाद तब सामने आया जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर अपने पति का एक कथित ऑडियो जारी किया था, जिसमें वे किसी अन्य महिला से बात करते सुने गए। इसके तुरंत बाद मंत्री ने वीडियो जारी कर पति पर गंभीर आरोप लगाए और देहरादून के कैंट थाने में तहरीर दी। मंत्री का आरोप है कि गिरधारी लाल साहू ने शादी के समय खुद को अविवाहित बताया था, जबकि वे पहले से शादीशुदा थे।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया कि साहू ने जाली हस्ताक्षर कर मंत्री को कई कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी और जातिसूचक अपशब्द कहने के आरोप में कैंट कोतवाली पुलिस ने विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, पुलिस की तलाश जारी
हाईकोर्ट से अंतरिम राहत न मिलने के बाद अब गिरधारी लाल साहू पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। देहरादून पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी फरार चल रहा है और पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं। अदालत ने अब सरकार और शिकायतकर्ता रेखा आर्या को 3 नवंबर तक अपना जवाब पेश करने का समय दिया है।
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि एक कैबिनेट मंत्री और उनके पति के बीच का यह पारिवारिक व कारोबारी विवाद अब सीधे तौर पर भारी-भरकम भ्रष्टाचार के आरोपों और पुलिसिया कार्रवाई के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है।









