Vijayadashami Puja : विजयादशमी का पर्व हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
इस खास मौके पर रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाए जाते हैं। इसे भगवान राम की रावण पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ही दशहरा मनाया जाता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था।
वहीं माता दुर्गा ने असुर महिषासुर का नामोनिशान मिटाकर देवताओं को विजय दिलाई थी। यही वजह है कि विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन परिवार और अपनों के साथ खुशियों के पल बिताना बेहद खास माना जाता है। रामलीला जाकर रावण दहन देखना इस बात का एहसास कराता है कि बुराई लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
इसके अलावा, इस दिन कुछ विशेष चीजें करनी चाहिए, जिससे घर में खुशहाली और पॉजिटिव एनर्जी बनी रहे:
सुबह-सुबह स्नान और पूजा: दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के बड़ों का पैर छूकर आर्शीवाद लें। नवरात्रि वाले कलश का जल घर में छिड़कें।
शमी के पौधे की पूजा: शमी के पौधे को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। इसकी पत्तियों को मां दुर्गा के चरणों में अर्पित करें। यह घर में खुशहाली लाता है।
मां दुर्गा के वस्त्रों की सफाई: विजयादशमी के दिन माता दुर्गा की विदाई होती है। उनके वस्त्रों को अच्छे से साफ करके रख दें। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
टूटी चीजें घर से बाहर करें: घर में अगर कोई टूटी या बेकार वस्तु हो, तो उसे दशहरे से पहले या सुबह ही बाहर कर दें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
शांति और सकारात्मक सोच: इस दिन शांति बनाए रखें। नेगेटिव विचारों से दूर रहें और केवल अच्छे शब्द बोलें। किसी से बहस या विवाद न करें।
विजयादशमी का दिन केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि अपने मन और घर को पॉजिटिव ऊर्जा से भरने का भी अवसर है।
इस दिन के छोटे-छोटे कर्म आपके जीवन में खुशियों और सफलता को आमंत्रित करते हैं।









