---Advertisement---

Dussehra Puja Mantra : दशहरा पर इन 6 मंत्रों से करें साधना, हर कार्य होगा सफल

---Advertisement---

Dussehra Puja Mantra : दशहरा का पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। नवरात्रि की महानवमी के अगले दिन आने वाली यह तिथि विजयादशमी के नाम से भी जानी जाती है।

इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। शाम के समय देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मनाया जाता है।

परंपरा के अनुसार इस दिन शस्त्र पूजा, देवी पूजन और विशेष मंत्रों के जाप का भी विधान है।

देवी अपराजिता की पूजा

दशहरा के दिन मां अपराजिता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि उनके मंत्र “ॐ अपराजितायै नमः” के जाप से व्यक्ति अपराजित रहता है और हर कार्य में सफलता प्राप्त करता है।

अगर किसी कठिन काम की शुरुआत करनी हो तो अपराजिता स्तोत्र का पाठ या श्रवण करना फलदायी होता है।

मां दुर्गा का मंत्र

विजयादशमी शक्ति की साधना का दिन भी माना जाता है। इस अवसर पर मां दुर्गा के मंत्र “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जाप करने से शक्ति और विजय की प्राप्ति होती है।

महिषासुरमर्दिनी स्तुति

मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। दशहरा पूजा में महिषासुरमर्दिनी स्तुति या स्तोत्र का पाठ करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

श्रीराम मंत्र

दशमी तिथि को भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसलिए इस दिन “ॐ श्रीरामाय नमः” मंत्र का जाप करने से धर्म की स्थापना, साहस और विजय की प्राप्ति होती है।

शमी वृक्ष की पूजा

दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इसे दुखों का नाश करने वाला वृक्ष माना गया है।

पूजा के समय यह मंत्र पढ़ा जाता है –

“शमी शमी महाशक्ति सर्वदुःख विनाशिनी। अर्जुनस्य प्रियं वृक्षं शमी वृक्षं नमाम्यहम्॥”

विजय मंत्र

कार्य सिद्धि और शत्रुओं पर विजय के लिए दशहरा पर “ॐ विजयायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment