Sarva Pitru Amavasya Puja Vidhi : सर्वपितृ अमावस्या हिंदू पंचांग में एक खास दिन माना जाता है। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन पितरों को विदा कर आभार व्यक्त किया जाता है और उनके लिए तर्पण, श्राद्ध और दान करने का विधान है। इस साल सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर 2025 को पड़ रही है।
आश्विन कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या 20 सितंबर की रात 12:17 बजे से शुरू होकर 21 सितंबर तक रहेगी। उदया तिथि 21 सितंबर को होने से यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।
पितरों को विदा करने का महत्व
मान्यता है कि अमावस्या के दिन किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
अगर किसी को पितरों की तिथि ज्ञात नहीं है, तो इस दिन सभी दिवंगत आत्माओं का सामूहिक श्राद्ध किया जा सकता है।
अमावस्या पर किए जाने वाले प्रमुख उपाय
श्राद्ध और तर्पण – ब्राह्मण को भोजन कराकर तिलक लगाएं और दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद पितरों के नाम से तर्पण करें।
दीपदान और प्रसाद – शाम को पीपल के पेड़ के नीचे चारमुखी दीपक जलाएं और भोजन व मिठाई अर्पित करें। मन ही मन पितरों का आभार व्यक्त करें।
मंदिर में दीप जलाना – किसी शिवालय में शिवलिंग के पास घी का दीप जलाएं और पितरों की आत्मा की मुक्ति की प्रार्थना करें।
विशेष भोग – इस दिन चावल की खीर बनाकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है। साथ ही भूल-चूक के लिए क्षमा भी मांगी जाती है।
धार्मिक पाठ – गीता के सप्तम अध्याय का सात बार पाठ करके उसका फल पितरों को समर्पित करना शुभ माना जाता है।
दान पुण्य – सुबह स्नान कर शुद्ध होकर अन्न, वस्त्र, गौ-दान, सोना या अपनी क्षमता अनुसार कोई भी दान करें।
पितृदोष से मुक्ति का उपाय
मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर सच्चे मन से किए गए श्राद्ध और दान से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-शांति आती है।









