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Meta AI : क्या अब सुरक्षित नहीं रहेंगी चैट्स? 16 दिसंबर से बदलने जा रहे हैं नियम

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Meta AI : सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी Meta ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान किया है, जिसने यूजर्स के बीच हलचल मचा दी है। 16 दिसंबर 2025 से Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स पर Meta AI (Meta AI) फीचर्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की चैट और वॉयस बातचीत को डेटा के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

इसका मकसद है आपको ज्यादा पर्सनलाइज्ड विज्ञापन (personalized ads) और कंटेंट दिखाना। कंपनी का कहना है कि यह कदम यूजर एंगेजमेंट (user engagement) को बेहतर बनाने की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन यह गोपनीयता (privacy) को लेकर सवाल भी खड़े कर रहा है। आखिर क्या है ये नया नियम और इसका आप पर क्या असर होगा? आइए जानते हैं।

क्या है Meta का नया प्लान?

Meta ने साफ किया है कि यह बदलाव यूजर्स का अनुभव और बेहतर करने के लिए लाया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब आपकी निजी बातचीत पर कंपनी की नजर होगी? Instagram के हेड Adam Mosseri ने एक वीडियो में इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, “हम आपकी आवाज नहीं सुनते।” फिर भी, यह नई नीति यूजर्स को पूरी तरह ऑप्ट-आउट (opt-out) करने का विकल्प नहीं देती।

आप सिर्फ “Ad Preferences” और “Feed Controls” के जरिए विज्ञापनों को कुछ हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। यानी, अगर आप Meta AI (Meta AI) का इस्तेमाल करते हैं, तो आपका डेटा विज्ञापन और कंटेंट सुझावों के लिए इस्तेमाल हो सकता है।

क्या बदलेगा आपके लिए?

Meta के मुताबिक, अगर आप Instagram, WhatsApp या Messenger पर Meta AI (Meta AI) के साथ टेक्स्ट या वॉयस के जरिए बात करते हैं, तो उस डेटा का इस्तेमाल कंटेंट सुझाव और टारगेटेड विज्ञापन (targeted ads) के लिए होगा। मिसाल के तौर पर, अगर आप AI से किसी खास टॉपिक पर बात करते हैं, तो उसी से जुड़े विज्ञापन या पोस्ट आपके सामने आ सकते हैं।

कंपनी का कहना है कि यह माइक्रोफोन से “जीरो-सेकेंड” सुनने जैसा नहीं है। सिर्फ AI चैट और वॉयस प्रोम्प्ट का डेटा ही इस्तेमाल होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या आपकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी?

यूजर्स के सामने क्या चुनौती?

इस नई नीति में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यूजर्स के पास ऑप्ट-आउट (opt-out) का कोई सीधा रास्ता नहीं है। अगर आप Meta AI (Meta AI) फीचर्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपका डेटा इस्तेमाल हो सकता है। आप सिर्फ Ad Preferences और Feed Controls के जरिए विज्ञापनों को सीमित कर सकते हैं। ऐसे में यूजर्स को यह ध्यान रखना होगा कि वे AI चैट में कितनी और कैसी जानकारी शेयर कर रहे हैं।

खासकर संवेदनशील जानकारी देना जोखिम भरा हो सकता है। अगर आप इस नीति से बचना चाहते हैं, तो Meta AI फीचर्स का इस्तेमाल बंद करना ही एकमात्र रास्ता हो सकता है।

क्या करें यूजर्स?

Meta की इस नई नीति ने गोपनीयता (privacy) को लेकर बहस छेड़ दी है। अगर आप नहीं चाहते कि आपका डेटा विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल हो, तो सावधानी बरतें। AI फीचर्स का कम से कम इस्तेमाल करें और अपनी Ad Preferences को समय-समय पर चेक करें। यह बदलाव न सिर्फ तकनीकी दृष्टिकोण से बल्कि आपकी निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए भी अहम है।

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