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Kartik Purnima Snan : 8 अक्टूबर से आरंभ होगा कार्तिक महीना, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे करें स्नान-दा

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Kartik Purnima Snan : हिंदू पंचांग में कार्तिक माह का विशेष स्थान है। यह महीना न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और शुद्धता का संदेश भी देता है।

इस साल कार्तिक माह की शुरुआत 8 अक्टूबर, बुधवार से हो रही है। इस दिन से पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु की आराधना का शुभ समय आरंभ होगा।

कार्तिक माह कब शुरू हो रहा है?

पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण द्वितीया तिथि से इस वर्ष कार्तिक माह का प्रारंभ होगा। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 7 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह 09:16 बजे से हुई थी, जो 8 अक्टूबर को सुबह 05:53 बजे तक रहेगी।

उदयातिथि में कार्तिक कृष्ण द्वितीया तिथि प्राप्त होने के कारण, कार्तिक माह का आरंभ द्वितीया तिथि से माना जाएगा। इस दिन हर्षण योग प्रातःकाल से देर रात 01:33 बजे तक रहेगा, जिसके बाद वज्र योग प्रारंभ होगा।

वहीं, अश्विनी नक्षत्र सुबह से लेकर रात 10:44 बजे तक रहेगा और उसके बाद भरणी नक्षत्र का प्रवेश होगा।

कार्तिक माह के पहले दिन का शुभ मुहूर्त

कार्तिक माह के पहले दिन स्नान का सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जो सुबह 04:39 से 05:29 बजे तक रहेगा।

सूर्योदय: 06:18 ए.एम.

चंद्रोदय: 06:39 पी.एम.

द्वितीया तिथि: 9 अक्टूबर को तड़के 02:22 ए.एम. तक रहेगी।

इस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और भगवान विष्णु का ध्यान अत्यंत फलदायी माना गया है।

कार्तिक स्नान का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने कार्तिक माह में मत्स्य अवतार लिया था और उन्होंने जल में निवास किया था। इस कारण से इस पूरे महीने को जल और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस माह में पवित्र नदियों या तीर्थस्थलों पर स्नान और दान करता है, उसे पापों से मुक्ति और विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होता है।

कार्तिक माह में स्नान और दान केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक संतुलन का भी माध्यम है।

यही वजह है कि लोग इस महीने कल्पवास करते हैं यानी नदी के किनारे रहकर तप, दान और भक्ति में समय बिताते हैं।

कार्तिक माह के प्रमुख स्नान की तिथियां

हालांकि कार्तिक माह में रोज स्नान और दान करना श्रेष्ठ माना गया है, लेकिन समय के अभाव में हर कोई ऐसा नहीं कर पाता। ऐसे में तीन मुख्य तिथियों पर स्नान और दान करने से भी पूर्ण पुण्यफल प्राप्त होता है।

तुला संक्रांति स्नान – 17 अक्टूबर (शुक्रवार)

इस दिन सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे। तुला संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान कर
गेहूं, गुड़, तिल, लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल फल, तांबा और केसर का दान करना शुभ होता है। ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कार्तिक अमावस्या स्नान – 21 अक्टूबर (मंगलवार)

कार्तिक अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। इस दिन स्नान कर तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। अन्न, वस्त्र, दीपदान और तिल दान विशेष रूप से शुभ माने गए हैं।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान – 5 नवंबर (बुधवार)

कार्तिक पूर्णिमा का दिन इस माह का सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यकारी दिन होता है। इस दिन स्नान कर चावल, दूध, सफेद वस्त्र, मोती, चांदी, और शक्कर का दान करने से चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है।

कहते हैं, इस दिन किया गया स्नान और दान हजार यज्ञों के बराबर फल देता है।

कार्तिक माह को “धर्म, दान और तप” का महीना कहा गया है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए भी अत्यंत लाभकारी होता है।

8 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस पवित्र महीने में यदि आप स्नान, दान और ध्यान का संकल्प लेते हैं, तो निश्चित रूप से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि का मार्ग खुलता है।

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