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Gratuity : 4 साल 240 दिन काम करने पर भी मिलती है ग्रेच्युटी, जानिए पूरा नियम

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Gratuity : कर्मचारियों के लिए नौकरी में मिलने वाले फायदों में ग्रेच्युटी (Gratuity) एक खास जगह रखती है। यह कंपनी की ओर से कर्मचारी को लंबे समय तक मेहनत और निष्ठा के लिए दिया जाने वाला इनाम है। ग्रेच्युटी को रिटायरमेंट बेनिफिट्स (Retirement Benefits) का हिस्सा माना जाता है, जिसमें पेंशन और प्रोविडेंट फंड (Provident Fund – PF) भी शामिल हैं।

इस योजना में कुछ रकम कर्मचारी की सैलरी से कटती है, जबकि बाकी हिस्सा कंपनी देती है। आइए जानते हैं कि ग्रेच्युटी (Gratuity) क्या है, कब मिलती है और इसका फायदा कैसे उठाया जा सकता है।

ग्रेच्युटी कब और कैसे मिलती है?

पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 (Payment of Gratuity Act) के तहत, अगर किसी कंपनी में 10 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, तो वहां के सभी स्थायी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का हक मिलता है।

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल तक नौकरी करना जरूरी है। लेकिन सच यह है कि अगर आपने किसी कंपनी में 4 साल और 240 दिन काम किया है, तो भी आप ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार हैं। यह नियम कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।

खान और अंडरग्राउंड कर्मचारियों के लिए खास छूट

कोयला खदानों या अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के नियम थोड़े आसान हैं। ऐसे कर्मचारियों को केवल 4 साल और 190 दिन काम करने पर ही 5 साल की सेवा पूरी मान ली जाती है। इसका मतलब है कि जो लोग जमीन के नीचे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, उन्हें ग्रेच्युटी (Gratuity) का लाभ जल्दी मिल सकता है। यह प्रावधान उनके लिए एक बड़ा सहारा है।

अनहोनी में परिवार को सहारा

अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की समय सीमा लागू नहीं होती। चाहे कर्मचारी ने कितने ही दिन काम किया हो, उसके परिवार को ग्रेच्युटी (Gratuity) का पूरा लाभ मिलता है। यह नियम कर्मचारी के परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए बनाया गया है, ताकि मुश्किल वक्त में उन्हें सहारा मिल सके।

ग्रेच्युटी की गणना का आसान तरीका

ग्रेच्युटी की राशि निकालने के लिए एक तय फॉर्मूला है:
ग्रेच्युटी = अंतिम सैलरी × (15/26) × (कंपनी में कुल साल)

इसमें महीने के 26 दिन गिने जाते हैं, क्योंकि 4 दिन छुट्टियां मानी जाती हैं। प्रति वर्ष 15 दिनों की सैलरी के आधार पर ग्रेच्युटी (Gratuity) की रकम तय होती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी ने 20 साल तक नौकरी की और उसकी आखिरी सैलरी 50,000 रुपये है, तो उसकी ग्रेच्युटी होगी:

50,000 × (15/26) × 20 = ₹5,76,923
यह रकम कर्मचारी को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलती है।

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