Aaj Ka Panchang 14 October 2025 : मंगलवार को हिंदू कैलेंडर के अनुसार दिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से गुजरेगा। यह तिथि दोपहर 12:24 बजे तक रहेगी, उसके बाद नवमी का प्रभाव शुरू हो जाएगा। अष्टमी को दुर्गा सप्तशती के पाठ या छोटे-मोटे अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है, लेकिन सामान्य दिनों में यह स्थिरता लाने वाला समय होता है।
दिल्ली जैसे शहरों में सूर्योदय करीब सुबह 6:30 बजे होगा, जो पिछले दिनों से थोड़ा देर से उगेगा। शाम को सूर्यास्त 5:45 बजे के आसपास होगा, यानी दिन की लंबाई अब छोटी होने लगी है। चंद्रोदय रात 8:15 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10:20 बजे रहेगा। यह सब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि पंचांग हमारी दैनिक जिंदगी को संतुलित रखने का पुराना तरीका है।
तिथि और पक्ष: अष्टमी से नवमी की ओर
कृष्ण पक्ष अष्टमी इस दिन का मुख्य चरण है। तिथि चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होती है, और अष्टमी मां दुर्गा की आराधना से जुड़ी रहती है। दोपहर के बाद नवमी आ जाएगी, जो नवरात्रि जैसे उत्सवों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन 2025 में यह सामान्य मंगलवार है, इसलिए लोग इसे घरेलू पूजा या छोटे फैसलों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
पक्ष कृष्ण होने से चंद्रमा की रोशनी कम रहेगी, लेकिन रात्रि में तारों की चमक ज्यादा नजर आएगी। अगर आपका जन्म अष्टमी में हुआ है, तो यह दिन थोड़ा खास लग सकता है, क्योंकि तिथि का प्रभाव व्यक्तिगत ऊर्जा पर पड़ता है। कुल मिलाकर, तिथि का यह संयोजन दिन को संयमपूर्ण बनाता है – न ज्यादा उत्तेजना, न ज्यादा सुस्ती।
नक्षत्र: पुनर्वसु का स्थिर प्रभाव
दिन भर पुनर्वसु नक्षत्र छाया रहेगा, जो दोपहर 12:26 बजे के बाद पूरी तरह हावी हो जाएगा। यह नक्षत्र बुद्धि और वृद्धि का प्रतीक है, जुड़वां देवता अश्विनी कुमारों से जुड़ा हुआ। अगर आपको यात्रा या नया सीखना है, तो पुनर्वसु अच्छा साथी साबित हो सकता है। लेकिन याद रखें, नक्षत्र का फल स्थान और व्यक्ति पर निर्भर करता है।
उदाहरण के लिए, उत्तर भारत में यह नक्षत्र व्यापार शुरू करने वालों के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि दक्षिण में इसे पारिवारिक मामलों से जोड़ा जाता है। 14 अक्टूबर को चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा, जो संवाद को बढ़ावा देगा। तो, अगर मीटिंग या बातचीत का प्लान है, तो यह समय सही लगेगा। नक्षत्र की यह स्थिरता दिन को बिना उतार-चढ़ाव के बनाए रखेगी।
योग: सिद्ध का सफल संकेत
सिद्ध योग सुबह 5:55 बजे से शुरू होकर अगले दिन तक चलेगा। यह योग सिद्धि या सफलता का द्योतक है, खासकर रचनात्मक कामों में। मंगलवार होने से यह और मजबूत लगेगा, क्योंकि मंगल ऊर्जा का कारक है। अगर आप कोई प्रोजेक्ट पूरा करना चाहते हैं, तो दोपहर का समय चुनें। योग चंद्र-सूर्य की स्थिति से बनता है, और सिद्ध में बाधाएं कम आती हैं।
लेकिन अति आत्मविश्वास से बचें – पंचांग सिर्फ मार्गदर्शन है, मेहनत आपकी। यह योग उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय से रुका हुआ काम निपटाना चाहते हैं। कुल मिलाकर, दिन की शुरुआत में थोड़ी थकान हो सकती है, लेकिन दोपहर से गति पकड़ लेगी।
करण: तैतिल और गरज का संतुलन
करण तिथि का आधा हिस्सा होता है, और आज बाला करण रात 11:42 बजे तक चलेगा, उसके बाद कौलव। लेकिन मुख्य रूप से तैतिल का प्रभाव दोपहर से शाम तक रहेगा। तैतिल को यात्रा या पत्राचार के लिए अच्छा माना जाता है, जबकि गरज बाद में आकर स्थिरता लाएगा। मंगलवार के करण में सावधानी बरतें, खासकर वाहन चलाते समय।
करण छोटा लगता है, लेकिन यह दैनिक छोटे फैसलों को प्रभावित करता है – जैसे कब खाना बनाएं या कब आराम करें। अगर आपका जन्म ऐसे करण में हुआ, तो दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी। यह हिस्सा पंचांग का वो हिस्सा है जो जिंदगी के छोटे-छोटे पलों को सुगम बनाता है।
शुभ-अशुभ मुहूर्त: राहु काल से सावधान
शुभ मुहूर्त में अभिजीत का समय सुबह 12:05 से 12:55 बजे तक रहेगा, जो किसी भी नए काम के लिए बेस्ट है। अमृत काल दोपहर 3:15 से 4:50 बजे, जहां सकारात्मक ऊर्जा चरम पर होगी। लेकिन राहु काल दोपहर 2:00 से 3:30 बजे तक अशुभ है – इस दौरान बड़े फैसले टालें।
यमगंड दोपहर 9:00 से 10:30 बजे, और गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00 बजे। दुर्मुहूर्त सुबह 8:45 से 9:30 बजे तक। वर्ज्यम दोपहर 1:20 से 2:55 बजे। ये समय पंचांग के आधार पर तय होते हैं, जो वैदिक गणना से निकलते हैं। मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ना शुभ रहेगा।









