Tata Nexon : देश में 22 सितंबर से लागू हुए GST 2.0 ने छोटी कारों की कीमतों में लाखों रुपये की कटौती की थी। ऑटोमोबाइल कंपनियों को उम्मीद थी कि 5 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आएगा। लेकिन सितंबर 2025 की सेल्स रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। छोटी कारों की बिक्री में बढ़ोतरी तो हुई, लेकिन टॉप-10 कारों की लिस्ट में SUVs ने बाजी मार ली।
टाटा नेक्सन, हुंडई क्रेटा, महिंद्रा स्कॉर्पियो और टाटा पंच ने टॉप-5 पोजीशन पर कब्जा जमाया। इस लिस्ट में केवल एक सेडान, मारुति डिजायर, अपनी जगह बना पाई। इन सभी कारों ने सालाना आधार पर शानदार ग्रोथ हासिल की।
टॉप-10 कारों की बिक्री का हाल
सितंबर 2025 की टॉप-10 कारों की सेल्स रिपोर्ट पर नजर डालें तो टाटा नेक्सन ने सबको पीछे छोड़ा। इस SUV की 22,573 यूनिट्स बिकीं, जबकि सितंबर 2024 में यह आंकड़ा 11,470 था। यानी टाटा नेक्सन को 97% की जबरदस्त सालाना ग्रोथ मिली। मारुति डिजायर ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 20,038 यूनिट्स की बिक्री के साथ 85% की ग्रोथ हासिल की।
हुंडई क्रेटा ने 18,861 यूनिट्स बिक्री के साथ 19% की ग्रोथ दर्ज की। महिंद्रा स्कॉर्पियो ने 18,372 यूनिट्स की बिक्री के साथ 27% की बढ़ोतरी हासिल की। वहीं, टाटा पंच ने 15,891 यूनिट्स की बिक्री के साथ 16% की ग्रोथ दिखाई।
हालांकि, कुछ कारों को नुकसान भी हुआ। मारुति स्विफ्ट की बिक्री में 4% की गिरावट आई और 15,547 यूनिट्स बिकीं। मारुति वैगनआर ने 15,388 यूनिट्स की बिक्री के साथ 15% की ग्रोथ हासिल की। मारुति फ्रोंक्स और मारुति बलेनो की बिक्री में क्रमशः 1% और 8% की गिरावट दर्ज की गई। मारुति अर्टिगा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिसकी बिक्री 31% घटकर 12,115 यूनिट्स रही।
सस्ती कारों का प्रदर्शन
सितंबर 2025 की टॉप-25 कारों की लिस्ट में दो सस्ती कारों, टाटा टियागो और मारुति ऑल्टो K10, ने जगह बनाई। टाटा टियागो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8,322 यूनिट्स की बिक्री की और 97% की सालाना ग्रोथ हासिल की। दूसरी ओर, मारुति ऑल्टो K10 की बिक्री में 37% की गिरावट आई और यह 5,434 यूनिट्स ही बिक पाई।
SUVs का दबदबा क्यों?
GST 2.0 के बावजूद छोटी कारों की जगह SUVs की डिमांड बढ़ रही है। टाटा नेक्सन, हुंडई क्रेटा, महिंद्रा स्कॉर्पियो और टाटा पंच जैसी गाड़ियों की मजबूत डिजाइन, दमदार फीचर्स और किफायती कीमत ने ग्राहकों का दिल जीत लिया। फेस्टिव सीजन में लोग अब SUVs को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिसके चलते छोटी कारों की उम्मीदों को झटका लगा है।









