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Justice Yashwant Varma : जले नोट, जांच और बर्खास्तगी, जस्टिस वर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

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Justice Yashwant Varma : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ जांच समिति की रिपोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले ने न केवल जस्टिस वर्मा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि न्यायिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया पत्र पूरी तरह संवैधानिक था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी गंभीर परिस्थितियों में मुख्य न्यायाधीश की कार्रवाई संविधान के दायरे में है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रक्रिया सही दिशा में बढ़ रही है।

मार्च 2025 में सामने आया था ‘जले नोट’ कांड

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब मार्च 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची। आग बुझाने के दौरान स्टोर रूम से भारी मात्रा में जले और अधजले नोट बरामद हुए। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी मचा दी। सवाल उठने लगे कि एक हाईकोर्ट जज के घर इतनी बड़ी रकम कहां से आई और वह आग में क्यों जली?

जांच समिति ने क्या पाया?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तुरंत एक्शन लेते हुए जस्टिस वर्मा का तबादला उनके मूल इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया और एक तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई। इस समिति ने अपनी जांच में पाया कि जले हुए नोट जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में थे। हालांकि, समिति ने यह भी कहा कि इस कमरे तक जज या उनके परिवार की सीधी पहुंच नहीं थी।

फिर भी, मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने सिर्फ तबादले को नाकाफी माना और कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की। समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी।

संसद में शुरू होगी बर्खास्तगी की प्रक्रिया

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर इस प्रक्रिया को और मजबूती दे दी है। अब यह मामला संसद में जाएगा, जहां विशेष बहुमत के जरिए जज को हटाने का फैसला लिया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब किसी हाईकोर्ट जज के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो रही है, लेकिन इस मामले ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े किए हैं।

जस्टिस वर्मा की दलीलें बेकार

जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जांच समिति की प्रक्रिया गलत थी और मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और यह सब उनकी छवि खराब करने की साजिश है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जांच समिति ने उचित प्रक्रिया का पालन किया और मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश संविधान के अनुरूप थी।

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