Dehradun School Fire : देहरादून के भानियावाला इलाके में स्थित श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में आज सुबह करीब 5 बजे कुछ कमरों में अचानक आग भड़क उठी। शुरुआत छोटी-सी लगी, लेकिन पलक झपकते ही आग ने बाकी कमरों को भी अपनी लपटों में जकड़ लिया। आसपास के लोग जब स्कूल की बिल्डिंग से धुआं उड़ता देखा, तो घबराहट में फौरन फायर ब्रिगेड को खबर की। टीम ने दौड़ लगाई और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।
ऐसी आग की घटनाएं आमतौर पर बिजली की खराबी, ज्वलनशील चीजों के रिसाव, इंसानी चूक या ज्यादा गर्मी-शॉर्ट सर्किट से होती रहती हैं। ज्यादातर मामलों में खराब वायरिंग, ज्यादा लोड पड़ना और सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाना ही असली विलेन साबित होता है।
आग लगने के प्रमुख कारण
सुरक्षा नियमों को ताक पर रखना आजकल आग की सबसे बड़ी वजह बन गया है। जहां सही सेफ्टी कदमों की कमी हो और स्टैंडर्ड्स की परवाह न की जाए, वहां खतरा दुगना हो जाता है।
ज्वलनशील सामान के पास हवा का बहाव कम होना भी मुसीबत खड़ी कर देता है। खासकर जब आसपास गर्मी का कोई स्रोत हो, तो आग का रिस्क आसमान छूने लगता है।
बिजली की गड़बड़ी तो आग का सबसे बड़ा दुश्मन है। टूटी-फूटी वायरिंग, ढीले कनेक्शन, पुराने फ्यूज या ज्यादा बोझ तले दबी इलेक्ट्रिक सिस्टम से शॉर्ट सर्किट हो जाता है। गर्मियों में तो हालत और पतली हो जाती है – एसी और कूलर चालू-चालू रहने से लोड बढ़ता है और चिंगारी उड़ने लगती है।
पेट्रोल, डीजल या एसी गैस जैसे खतरनाक पदार्थों का रिसाव भी आग को न्योता देता है। अगर ये चीजें गर्मी या चिंगारी से टकरा जाएं, तो सब कुछ राख हो जाता है।
इंसानी गलतियां भी कम नहीं हैं। बिना नजर रखे चूल्हे पर खाना छोड़ देना, बच्चे आग से खेलें या हीटिंग वाले सामान का गलत इस्तेमाल – ये सब आग बुलावा देते हैं।
गर्मी का असर तो सबसे घातक है। तापमान चढ़ने और हवा में नमी घटने से सूखी घास-पत्तियां पल में जल उठती हैं। तेज धूप में खड़ी गाड़ियों के अंदर के पार्ट्स गर्म होकर आग लगा देते हैं।









