GST Reforms : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने के लिए जीएसटी (GST) में किए गए सुधारों की बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हाल ही में जीएसटी (GST) में किए गए बदलावों से करीब 2 लाख करोड़ रुपये आम जनता तक पहुंचेंगे। इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को खास फायदा होगा।
अब लोग अपनी जरूरतों के लिए ज्यादा खर्च कर सकेंगे, जिससे उनकी जिंदगी और आसान होगी। आइए, इन सुधारों की पूरी डिटेल्स को आसान भाषा में समझते हैं।
रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती
विशाखापत्तनम में आयोजित ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स’ कार्यक्रम में निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी (GST) के तहत अब 99% सामान, जो कुल जीएसटी राजस्व का 12% हिस्सा देते थे, 5% टैक्स स्लैब में आ जाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि रोजमर्रा की जरूरी चीजें, जैसे खाने-पीने का सामान, अब सस्ता हो जाएगा।
अब आपको ब्रेड, दूध, पनीर जैसी चीजों पर कम टैक्स देना होगा। इससे आपकी जेब पर बोझ कम होगा और हर महीने कुछ पैसे बचेंगे। खासकर उन परिवारों के लिए ये राहत की खबर है, जो हर दिन जरूरी सामान खरीदते हैं।
कारोबारियों को भी मिलेगी राहत
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी (GST) सुधारों का फायदा सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि कारोबारियों को भी होगा। टैक्स नियमों को आसान करने से छोटे-बड़े व्यवसायों को अपने काम को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे उद्योगों को नई ताकत मिलेगी और वे तेजी से आगे बढ़ेंगे।
निर्मला सीतारमण ने ये भी बताया कि 2018 में जीएसटी (GST) से 7.19 लाख करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था, जो अब 2025 तक बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। साथ ही, टैक्स देने वालों की संख्या भी 65 लाख से बढ़कर 1.51 करोड़ हो गई है। यानी, अब ज्यादा लोग टैक्स सिस्टम में शामिल हो रहे हैं, जिससे सरकार की आय बढ़ रही है।
22 सितंबर से नई दरें लागू
15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से जीएसटी (GST) सुधारों की घोषणा की थी। इसके बाद जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी 2.0 (GST 2.0) को मंजूरी दी। इस नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब को और आसान किया गया है। अब ज्यादातर जरूरी सामान 5% टैक्स स्लैब में आएंगे, जबकि बाकी चीजों पर 18% टैक्स लगेगा। पहले के 12% और 28% टैक्स स्लैब को हटा दिया गया है।
खास बात ये है कि ब्रेड, दूध, और पनीर जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। ये नए नियम 22 सितंबर से लागू होंगे। इससे न सिर्फ आपका खर्च कम होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में पैसों का प्रवाह भी बढ़ेगा।









