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Health Tips : एक गिलास दूध से थायराइड दवा का असर कम हो सकता है, जानें कैसे

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Health Tips : थायराइड की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि दूध पीना थायराइड को बढ़ा सकता है।

लेकिन क्या यह सच है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट क्या कहते हैं और दूध से जुड़ी सच्चाई क्या है।

थायराइड और इसके लक्षण

थायराइड ग्लैंड आपके शरीर में थायराइड हार्मोन का उत्पादन करती है। कभी-कभी यह हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते (हाइपोथायराइड), तो कभी ज्यादा बन जाते हैं (हाइपरथायराइड)।

थायराइड की समस्या होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, ठंड लगना या नींद की समस्या।

दूध में क्या है खास?

दूध में कैल्शियम, विटामिन D, प्रोटीन और आयोडीन जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं। आयोडीन थायराइड ग्लैंड के लिए बहुत जरूरी है।

वहीं, फोर्टिफाइड डेयरी प्रोडक्ट्स में विटामिन D की मात्रा भी होती है, जो थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

दूध और थायराइड दवा का संबंध

एंडोक्राइन सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, एक गिलास दूध लेने से थायराइड की आम दवा लिवोथायरॉक्सिन का अब्जॉर्प्शन (absorption) कम हो सकता है।

इसका मतलब है कि दूध पीने से दवा का पूरा असर नहीं होता।

दवा लेने का सही तरीका

एक्सपर्ट बताते हैं कि लिवोथायरॉक्सिन दवा खाने के बाद चार से छह घंटे तक दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स से दूर रहना चाहिए। इससे दवा का असर सही तरीके से शरीर में होता है।

दूध पीने के फायदे

दूध थायराइड ग्लैंड को एक्टिव रखने में मदद करता है। कैल्शियम और आयोडीन शरीर को जरूरी पोषण देते हैं।

विटामिन D से थायराइड हार्मोन का संतुलन सही रहता है।

थायराइड होने पर दूध पीना हानिकारक नहीं है। बस ध्यान रखें कि दवा खाने के तुरंत बाद दूध न पिएं। सही समय और मात्रा में दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स लेने से थायराइड फंक्शन में सुधार आ सकता है और शरीर को जरूरी न्यूट्रिशन भी मिलते हैं।

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