Aaj Ka Panchang 04 October 2025 : हिंदू धर्म में हर दिन की शुरुआत पंचांग से होती है, जो न सिर्फ तिथि-नक्षत्र बताता है बल्कि जीवन के छोटे-बड़े फैसलों में मार्गदर्शन भी करता है। कल, यानी 4 अक्टूबर को शनिवार का दिन है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आता है। इस दिन द्वादशी तिथि का प्रारंभ होगा, जो दोपहर तक चलेगी और उसके बाद त्रयोदशी का प्रभाव रहेगा।
प्रदोष व्रत के लिए ये तिथियां खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि भगवान शिव के भक्त इस अवसर पर विशेष पूजन करते हैं। अगर आप भी कल के शुभ-अशुभ समय की तलाश में हैं, तो चलिए विस्तार से समझते हैं कि ये पंचांग आपके दिन को कैसे आकार दे सकता है।
कल का पंचांग भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है। कल सुबह धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, जो समृद्धि और धन लाभ से जुड़ा माना जाता है। दोपहर के बाद ये शतभिषा नक्षत्र में बदल जाएगा, जो चिकित्सा और रहस्यमयी ऊर्जाओं का प्रतीक है। इन नक्षत्रों के प्रभाव से कल के दिन व्यापारिक सौदे या स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने वालों को फायदा हो सकता है। लेकिन याद रखें, नक्षत्र का फायदा तभी मिलता है जब आप सूर्योदय के ठीक बाद उठकर स्नान कर लें और दिशा का ध्यान रखें।
तिथि और योग
दिन की तिथि पर नजर डालें तो कल सुबह से दोपहर 5:10 बजे तक द्वादशी रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी का आगमन होगा। द्वादशी को विष्णु भक्तों का दिन कहा जाता है, जबकि त्रयोदशी प्रदोष व्रत की नींव रखती है। योग की बात करें तो शूल योग सुबह से शाम 7:27 बजे तक रहेगा, जो थोड़ा चुनौतीपूर्ण लग सकता है क्योंकि ये यात्रा या वाद-विवाद से बचने की सलाह देता है। लेकिन चिंता न करें, शाम को ये गंड योग में बदल जाएगा, जो दृढ़ता और मेहनत से सफलता दिलाने वाला है। मेरे अनुभव में, ऐसे योगों में छोटे-मोटे धार्मिक अनुष्ठान करना सबसे अच्छा रहता है – जैसे घर में गणेश जी की आरती या शिवलिंग पर जल चढ़ाना। ये न सिर्फ मन को शांत करते हैं बल्कि नेगेटिव ऊर्जा को दूर भी भगाते हैं।
करण के लिहाज से, कल बालव करण सुबह 5:57 बजे तक रहेगा, जो रचनात्मक कामों के लिए ठीक है, जैसे कला या लेखन। उसके बाद कौलव करण दोपहर तक चलेगा, जो पारिवारिक चर्चाओं या छोटे खरीदारी के लिए उपयुक्त है। कुल मिलाकर, तिथि-योग-करण का ये संयोजन कल को संतुलित दिन बनाता है, जहां जल्दबाजी से बचना ही समझदारी है।
शुभ मुहूर्त और दैनिक समय
अब बात करते हैं उन समयों की जो कल आपके काम आ सकते हैं। नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:25 बजे होगा, जो थोड़ा देर से है क्योंकि अक्टूबर की ठंडक बढ़ रही है। सूर्यास्त शाम 5:45 बजे के आसपास होगा, यानी दिन छोटा रहेगा। चंद्रोदय दोपहर 3:55 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह होगा, जो रात्रि पूजन के लिए अच्छा समय देता है।
शुभ मुहूर्त की सूची देखें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक रहेगा – ये वो सुनहरा समय है जब विवाह, नामकरण या गृह प्रवेश जैसे बड़े काम किए जा सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:48 से 5:36 बजे तक, जो ध्यान-पूजा के लिए बिल्कुल सही है। अगर आप कल कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने की सोच रहे हैं, तो अमृत काल दोपहर 2:15 से 4:00 बजे तक का इंतजार करें।
दूसरी तरफ, अशुभ समय से सावधान रहें: राहुकाल दोपहर 9:00 से 10:30 बजे तक रहेगा, यमगंड दोपहर 3:00 से 4:30 बजे, और गुलिक काल सुबह 6:25 से 8:00 बजे। इन घंटों में महत्वपूर्ण फैसले टाल दें, वरना छोटी गलती बड़ी परेशानी बन सकती है।
चौघड़िया की बात करें तो सुबह का अमृत चौघड़िया 7:30 से 9:00 बजे तक शुभ रहेगा, जबकि शाम का लभ 5:45 से 7:15 बजे तक व्यापार के लिए अच्छा। प्रदोष व्रत के संदर्भ में, शाम 6:00 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक शिव पूजा का विशेष समय है। इस दौरान बेलपत्र, दूध और जल से अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
प्रदोष व्रत
4 अक्टूबर को प्रदोष व्रत का साया रहेगा, जो हर मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी को मनाया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है और कहते हैं कि इससे पापों का नाश होता है। कल स्नान के बाद सफेद वस्त्र धारण कर, शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाएं और ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करें। अगर आप पहली बार व्रत रख रहे हैं, तो सिर्फ फलाहार ही काफी है – दूध, फल और नट्स। मेरी सलाह है कि शाम को परिवार के साथ मिलकर पूजन करें, इससे घर का माहौल और भी सकारात्मक हो जाता है।









