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उत्तराखंड में ‘AI वार’: हरीश रावत के बाद अब भाजपा नेता का ऑडियो वायरल

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उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र बदल गया है. 2027 के चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन राज्य में सियासी तापमान अभी से चरम पर है. हैरानी की बात यह है कि यह लड़ाई बेरोजगारी, पलायन या आपदा प्रबंधन जैसे गंभीर मुद्दों पर नहीं, बल्कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के दम पर लड़ी जा रही है.

कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल एक-दूसरे पर डिजिटल हथियारों से छवि खराब करने का आरोप लगा रहे हैं. हालात यह हैं कि नेताओं को अपनी सफाई देने के लिए थानों के चक्कर तक काटने पड़ रहे हैं.

हरीश रावत का ‘फेक वीडियो’ और थाने में 4 घंटे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस नई डिजिटल जंग के पहले बड़े भुक्तभोगी बने हैं. हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो को उन्होंने AI जनित (Deepfake) बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया. रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा उनकी छवि धूमिल करने के लिए तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रही है.

अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए हरीश रावत को करीब चार घंटे तक पुलिस थाने में बैठना पड़ा. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन रावत का कहना है कि सत्ता पक्ष उनके खिलाफ दुष्प्रचार के लिए इन हथकंडों का सहारा ले रहा है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा.

भाजपा नेता के कथित ऑडियो से मचा हड़कंप कांग्रेस के हमलों के बीच भाजपा भी एक नए विवाद में घिर गई है. पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल होने से सियासत गरमा गई है. इस ऑडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वीआईपी के नाम पर भी चर्चा तेज है.

भाजपा नेताओं ने बचाव करते हुए इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार की गई साजिश करार दिया है. पार्टी का कहना है कि यह उनकी छवि खराब करने का एक सुनियोजित प्रयास है.

जांच को तैयार अभिनेत्री, भाजपा का पलटवार विवाद के केंद्र में आईं अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने भाजपा के दावों को खुली चुनौती दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर साफ कहा कि वायरल ऑडियो में आवाज पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की ही है. उर्मिला ने ऐलान किया कि वह अपने मोबाइल और पूरी बातचीत की उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच करवाने के लिए तैयार हैं, ताकि सच सामने आ सके.

दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इसे कांग्रेस की साजिश बताया है. उनका कहना है कि कांग्रेस एक महिला को ढाल बनाकर राजनीति कर रही है. भट्ट ने चेतावनी दी है कि इस तरह के हथकंडे कामयाब नहीं होंगे और पार्टी उस महिला के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी.

लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी विशेषज्ञ इस ट्रेंड को उत्तराखंड के लिए खतरनाक मान रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक सुनील दत्त पांडेय के मुताबिक, जब चुनाव से पहले ही तकनीक का दुरुपयोग इस स्तर पर होने लगे, तो असली मुद्दे गायब हो जाते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सेठी ने भी चिंता जताई है. उनका मानना है कि अगर नेताओं की आवाज और वीडियो से छेड़छाड़ का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, तो आने वाले समय में अधिकारी और विधायक जनता का फोन उठाने से भी कतराएंगे. यह अविश्वास और भ्रम की स्थिति राज्य के विकास के लिए बेहद घातक साबित होगी.

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