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Haldwani : स्कूल में पानी की बोतल में मिली शराब, बाथरूम में सिगरेट; अभिभावकों के लिए खतरे की घंटी

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हल्द्वानी के निजी स्कूलों में नशे के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जहां एक छात्रा पानी की बोतल में शराब और एक छात्र बाथरूम में सिगरेट पीते पकड़ा गया। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग ने इन छात्रों की काउंसलिंग शुरू कर दी है।

Haldwani : हल्द्वानी के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में नशे की दस्तक ने अभिभावकों और शिक्षा तंत्र दोनों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में शहर के दो अलग-अलग स्कूलों से बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।

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एक घटना में स्कूल आई छात्रा की पानी की बोतल से शराब बरामद हुई है, जबकि दूसरे मामले में एक छात्र को स्कूल के बाथरूम के अंदर सिगरेट पीते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।

मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग जारी

इन घटनाओं के सामने आते ही संबंधित स्कूल प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई की। अभिभावकों को तुरंत स्कूल बुलाया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा सहायता लेने का निर्णय लिया गया।

फिलहाल इन छात्रों को राजकीय मेडिकल कॉलेज (STH) के मनोचिकित्सा विभाग में भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं। मकसद है कि समय रहते बच्चों की मानसिक स्थिति को समझा जाए और उन्हें नशे की लत से दूर किया जा सके।

पिछले दो महीनों में बढ़े मामले

एसटीएच के मनोचिकित्सा विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। डॉ. पंत के अनुसार, “बीते दो महीनों में हमारे पास छात्र-छात्राओं से जुड़े कई ऐसे केस आए हैं।

बच्चे स्कूल में शराब या सिगरेट का सेवन करते या अपने पास रखते पाए गए हैं। स्कूल प्रबंधन के जरिए अभिभावकों को बुलाकर इन बच्चों की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई है।”

बच्चों के भटकने की वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों पर पढ़ाई और अपेक्षाओं का भारी मानसिक दबाव है। इसके अलावा दोस्तों की गलत संगत (Peer Pressure), मोबाइल और सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल और फिल्मों से मिल रही नकारात्मक प्रेरणा उन्हें इस रास्ते पर धकेल रही है।

कई मामलों में अभिभावकों की अत्यधिक व्यस्तता और पारिवारिक तनाव के कारण बच्चे अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं, जिसे दूर करने के लिए वे नशे का सहारा ले रहे हैं।

अभिभावक क्या करें?

मनोचिकित्सकों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बच्चों के साथ सख्ती के बजाय दोस्ताना व्यवहार अपनाना जरूरी है। माता-पिता बच्चों के साथ खुलकर बात करें और रोजाना उनके साथ समय बिताएं।

उनकी संगत और गतिविधियों पर नजर रखना अनिवार्य है। अगर बच्चे के व्यवहार में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करें।

Haldwani : हल्द्वानी के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में नशे की दस्तक ने अभिभावकों और शिक्षा तंत्र दोनों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में शहर के दो अलग-अलग स्कूलों से बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।

एक घटना में स्कूल आई छात्रा की पानी की बोतल से शराब बरामद हुई है, जबकि दूसरे मामले में एक छात्र को स्कूल के बाथरूम के अंदर सिगरेट पीते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।

मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग जारी

इन घटनाओं के सामने आते ही संबंधित स्कूल प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई की। अभिभावकों को तुरंत स्कूल बुलाया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा सहायता लेने का निर्णय लिया गया।

फिलहाल इन छात्रों को राजकीय मेडिकल कॉलेज (STH) के मनोचिकित्सा विभाग में भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं। मकसद है कि समय रहते बच्चों की मानसिक स्थिति को समझा जाए और उन्हें नशे की लत से दूर किया जा सके।

पिछले दो महीनों में बढ़े मामले

एसटीएच के मनोचिकित्सा विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। डॉ. पंत के अनुसार, “बीते दो महीनों में हमारे पास छात्र-छात्राओं से जुड़े कई ऐसे केस आए हैं।

बच्चे स्कूल में शराब या सिगरेट का सेवन करते या अपने पास रखते पाए गए हैं। स्कूल प्रबंधन के जरिए अभिभावकों को बुलाकर इन बच्चों की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई है।”

बच्चों के भटकने की वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों पर पढ़ाई और अपेक्षाओं का भारी मानसिक दबाव है। इसके अलावा दोस्तों की गलत संगत (Peer Pressure), मोबाइल और सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल और फिल्मों से मिल रही नकारात्मक प्रेरणा उन्हें इस रास्ते पर धकेल रही है।

कई मामलों में अभिभावकों की अत्यधिक व्यस्तता और पारिवारिक तनाव के कारण बच्चे अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं, जिसे दूर करने के लिए वे नशे का सहारा ले रहे हैं।

अभिभावक क्या करें?

मनोचिकित्सकों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बच्चों के साथ सख्ती के बजाय दोस्ताना व्यवहार अपनाना जरूरी है। माता-पिता बच्चों के साथ खुलकर बात करें और रोजाना उनके साथ समय बिताएं।

उनकी संगत और गतिविधियों पर नजर रखना अनिवार्य है। अगर बच्चे के व्यवहार में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करें।

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