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Almora News : अल्मोड़ा आयुर्वेदिक चिकित्सालय में फार्मेसी अधिकारी तैनात, हफ्ते में 3 दिन मिलेगी दवा

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अल्मोड़ा के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में फार्मेसी अधिकारी की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के प्रयासों और जनदबाव के बाद प्रशासन ने अस्पताल को नियमित संचालित करने और भविष्य में पूर्णकालिक नियुक्ति का लिखित आश्वासन दिया है।

अल्मोड़ा। (Almora News) उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में लंबे समय से चल रही फार्मेसी अधिकारी की कमी अब दूर हो गई है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने जनहित की मांग को स्वीकार करते हुए अस्पताल में अस्थायी फार्मेसी अधिकारी की नियुक्ति के आदेश विधिवत जारी कर दिए हैं। इस निर्णय से अल्मोड़ा शहर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उन मरीजों को बड़ी राहत मिली है, जो दवाओं के लिए लंबे समय से भटकने को मजबूर थे। फिलहाल नई व्यवस्था के तहत फार्मेसी अधिकारी सप्ताह के शुरुआती तीन दिनों में अपनी सेवाएं देंगे।

जिला चिकित्सालय के कक्ष संख्या 9 में मिलेगी सुविधा

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नियुक्त किए गए फार्मेसी अधिकारी प्रत्येक सोमवार, मंगलवार और बुधवार को जिला चिकित्सालय के कक्ष संख्या 9 में मरीजों को सेवाएं प्रदान करेंगे। यह कदम तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर उठाया गया है ताकि मरीजों को आयुर्वेदिक दवाओं के लिए निजी स्टोर या दूर-दराज के क्षेत्रों पर निर्भर न रहना पड़े। विभागीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अंतरिम व्यवस्था है और प्रशासन आगामी माह से यहां एक पूर्णकालिक फार्मेसी अधिकारी की स्थायी नियुक्ति सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।

अस्पताल बंद होने की अफवाहों पर लगा विराम

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के संचालन को लेकर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की आशंकाएं जताई जा रही थीं। हालांकि, अब प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस चिकित्सालय को किसी भी परिस्थिति में बंद नहीं किया जाएगा। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, यह अस्पताल सोमवार से शनिवार तक, राजकीय अवकाशों को छोड़कर, नियमित रूप से खुला रहेगा। इससे पूर्व “कैंप ड्यूटी” के नाम पर डॉक्टरों को अन्यत्र तैनात करने से चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई थी, जिस पर अब लगाम लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है ताकि दूर-दराज के मरीजों को असुविधा न हो।

सामाजिक कार्यकर्ता की आरटीआई और जनदबाव का असर

इस पूरी उपलब्धि के पीछे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे का निरंतर संघर्ष और जनदबाव मुख्य कारण माना जा रहा है। संजय पाण्डे ने चिकित्सालय की बदहाली और अधिकारियों की कमी को लेकर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन किया था, जिसकी प्रक्रिया अभी भी गतिमान है। उनके नेतृत्व में चली इस मुहिम और स्थानीय मीडिया के कड़े रुख के बाद ही स्वास्थ्य विभाग बैकफुट पर आया और नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। पाण्डे ने इसे आम जनता की जीत बताते हुए कहा कि जनसुविधाओं के संरक्षण के लिए उनका यह संघर्ष और निगरानी भविष्य में भी लगातार जारी रहेगी।

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