देहरादून, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को जड़ से मजबूत करने के लिए अब पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का सहारा लिया है। प्रदेश के हर प्रशासनिक ब्लॉक में आयुष क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे, जहां आम जनता को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।
मंगलवार को विधानसभा में आयुष विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इसके बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए आयुष मंत्री मदन कौशिक ने साफ किया कि यह पूरी योजना दिल्ली के प्रसिद्ध मोहल्ला क्लीनिक मॉडल से प्रेरित है।
इन क्लीनिकों का दायरा केवल सामान्य परामर्श तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने तय किया है कि यहां आयुर्वेद और होम्योपैथी के साथ-साथ पंचकर्म जैसी जटिल चिकित्सा पद्धतियां और आधुनिक वेलनेस सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और यहां मौजूद बेशकीमती औषधीय पौधों को अब सीधे अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य से जोड़ा जा रहा है। आयुष मंत्री के अनुसार, सरकार एक ऐसी नीति पर काम कर रही है जिसके तहत राज्य के प्रमुख होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं में आयुष सेवाएं अनिवार्य या सहयोगी के रूप में उपलब्ध होंगी।
हरिद्वार का ऋषिकुल परिसर जल्द ही एक नई वैश्विक पहचान हासिल कर सकता है। यहां ‘आयुष एम्स’ स्थापित करने के लिए शासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जिसके लिए लगभग 15 एकड़ जमीन की आवश्यकता है।
स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे जल्द से जल्द उपयुक्त भूमि का चयन कर रिपोर्ट सौंपें। इस संस्थान के बनने से उत्तराखंड न केवल उत्तर भारत, बल्कि पूरे देश में आयुर्वेद अनुसंधान का केंद्र बनकर उभरेगा।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और शैक्षणिक अड़चनों को दूर करने के लिए भी सख्त कदम उठाए गए हैं। निदेशक आयुर्वेद की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो विश्वविद्यालय की समस्याओं का बारीकी से अध्ययन कर सुधार के रोडमैप वाली रिपोर्ट सरकार को देगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी पर जोर देते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने भी कड़े निर्देश दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं का स्वास्थ्य प्राथमिकता होना चाहिए।
प्रथम महिला गुरमीत कौर ने भी बच्चों के पोषण और नियमित जांच को अभियान के रूप में चलाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और जागरूकता ही बीमारियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है, जिसे जमीनी स्तर पर उतारना अनिवार्य है।









