बागेश्वर, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के पर्वतीय जिले बागेश्वर में रविवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब धरती अचानक डोलने लगी। घड़ी में सुबह के 11 बजकर 47 मिनट हुए थे, तभी लोगों ने जमीन के नीचे से आती एक गड़गड़ाहट और कंपन महसूस किया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र 30.047 उत्तरी अक्षांश और 79.901 पूर्वी देशांतर पर जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। बागेश्वर की जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल ने स्पष्ट किया है कि भूकंप की तीव्रता कम थी, इसलिए फिलहाल कहीं से भी किसी मकान के गिरने या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। फिर भी, संवेदनशील जोन होने के नाते तहसील स्तर पर टीमों को अलर्ट रहने को कहा गया है।
दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भी शनिवार की देर रात धरती कांपी। संभाग मुख्यालय जगदलपुर और इसके आसपास के इलाकों में रात 11:32 बजे लोगों को जोरदार झटके महसूस हुए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, इसकी तीव्रता 4.4 रही और इसका केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से महज 5 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। बस्तर के दक्षिणी हिस्सों में भी इसका असर देखा गया, जहां लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।
भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की ओर खिसक रही है, जिससे हिमालयी बेल्ट (उत्तराखंड) और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में तनाव पैदा हो रहा है। बागेश्वर में इस साल यह तीसरा मध्यम झटका है; इससे पहले 13 जनवरी और 21 मार्च 2026 को भी यहां भूकंप दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरापुट-जगदलपुर बेल्ट में 4.4 की तीव्रता का झटका पिछले 20 सालों के सबसे बड़े झटकों में से एक माना जा रहा है, जो भूगर्भीय दृष्टि से एक नई चिंता का विषय है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और भी भयावह है। अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में शुक्रवार रात आए 5.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। वहां अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक ही परिवार के 8 सदस्य शामिल थे। काबुल से लेकर पंजशीर तक कई घर जमींदोज हो गए हैं। भारत में आए इन झटकों को भी इसी व्यापक भूगर्भीय हलचल का हिस्सा माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा ने साफ किया है कि भूकंप का मौसम के बदलाव से कोई लेना-देना नहीं होता, यह पूरी तरह से धरती के आंतरिक प्लेटों की हलचल है।









