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Belly Fat Reasons : पेट पर तेजी से जमा हो रही चर्बी का राज़, बढ़ती उम्र में कैसे करें कंट्रोल

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Belly Fat Reasons : जैसे-जैसे उम्र आगे बढ़ती है, शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा होने लगता है। खासतौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं क्योंकि 30 की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव तेज़ी से शुरू हो जाते हैं।

कई बार हम कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ रोज करते रहते हैं जिन पर ध्यान ही नहीं जाता। नतीजा यह होता है कि 35–40 की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते पेट, कमर और हिप्स पर फैट जमा होना शुरू हो जाता है और मोटापे से जुड़ी दिक्कतें जैसे डायबिटीज, हाई बीपी और थायराइड का जोखिम भी बढ़ जाता है।

अगर रोजमर्रा की कुछ आदतों को बदल दिया जाए, तो बेली फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है और आगे बढ़ने से रुक भी जाता है।

सुबह भूख क्यों नहीं लगती? देर रात हैवी डिनर है असली कारण

बहुत से लोग ब्रेकफास्ट स्किप करने की आदत बना लेते हैं। खासकर महिलाएं काम के चक्कर में या बिना भूख लगे सुबह का खाना टाल देती हैं। लेकिन यह आदत शरीर के हार्मोनल सिस्टम को खराब कर देती है।

असल समस्या देर रात भारी खाना खाने से शुरू होती है। जब रात का खाना ठीक से पच ही नहीं पाता, तब सुबह भूख लगना मुश्किल हो जाता है।

इसलिए कोशिश करें कि सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले खाना खा लें और सुबह उठने के एक घंटे के भीतर हल्का, पौष्टिक ब्रेकफास्ट जरूर करें। इससे हार्मोन संतुलित रहते हैं और फैट स्टोर होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।

दिन भर कुछ-ना-कुछ खाना भी बढ़ाता है कमर का फैट

कई लोग सोचते हैं कि हेल्दी स्नैक्स खाते रहना कोई गलती नहीं है। लेकिन दिन भर बार-बार खा लेना इंसुलिन को बार-बार बढ़ाता है। जैसे ही इंसुलिन बढ़ता है, शरीर तुरंत फैट स्टोर करने के मोड में चला जाता है – खासकर पेट, कमर और जांघों के आसपास।

बेहतर है कि दिन में 2–3 बार ही अच्छे से भोजन करें जिसमें पर्याप्त प्रोटीन हो। इससे इंसुलिन कंट्रोल रहता है और बेली फैट कम होने में मदद मिलती है।

सिर्फ दाल से प्रोटीन पूरा करने की गलती भी करती है परेशानी

वेजिटेरियन लोग अक्सर रोज-रोज दाल खाकर ही प्रोटीन पूरा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन बार-बार दाल खाने से कई बार वाटर रिटेंशन और ब्लॉटिंग जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

अपने खाने में थोड़ा वैराइटी शामिल करें—जैसे सोया, पनीर, टोफू, अंडे (अगर खाते हों), लीन मीट और फिश। जब आपकी डाइट में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का बैलेंस बन जाता है, तब शरीर आसानी से फैट बर्न करता है।

हाई-कार्ब ब्रेकफास्ट से बेली फैट बढ़ने लगता है

पोहा, ब्रेड, इडली, परांठे, चाय-बिस्कुट—ये सभी नाश्ते में हल्के जरूर लगते हैं, लेकिन कार्ब बहुत ज्यादा होते हैं। हाई-कार्ब ब्रेकफास्ट ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते और गिराते हैं। इससे दिन भर भूख और मीठा खाने की इच्छा बनी रहती है।

इसके बजाय कोशिश करें कि नाश्ते में प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। इससे शुगर लेवल स्टेबल रहता है और पेट के आसपास फैट जमा होना कम हो जाता है।

सिर्फ कार्डियो करना हमेशा फायदेमंद नहीं—स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी

प्रीमेनोपॉज उम्र की महिलाओं में सिर्फ कार्डियो करना कई बार उल्टा असर कर देता है। कार्डियो ज्यादा करने पर कॉर्टिसोल बढ़ सकता है और यह हार्मोन बेली फैट को तेजी से जमा करता है।

इसीलिए कोशिश करें कि रूटीन में हल्की वॉक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और मसल्स को एक्टिव रखने वाली एक्सरसाइज को शामिल करें। इससे शरीर फैट बर्न मोड में रहता है और मसल्स मजबूत होते हैं।

नींद पूरी न होना भी पेट पर फैट बढ़ने की बड़ी वजह

अगर आप रोज 7–8 घंटे की नींद नहीं ले पाते, तो शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं। इसका असर यह होता है कि दिनभर मीठा और जंक खाने की क्रेविंग बढ़ती है और शरीर फैट स्टोर करने लगता है।

अच्छी नींद न सिर्फ दिमाग को शांत करती है बल्कि मसल्स रिकवरी और फैट लॉस दोनों के लिए जरूरी है। पेट और कमर का फैट उम्र के साथ बढ़ना सामान्य है, लेकिन इसे रोका जा सकता है।

बस खाने का समय सही रखें, ब्रेकफास्ट को हेल्दी बनाएं, बार-बार स्नैकिंग से बचें और वर्कआउट में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूर जोड़ें। कुछ ही हफ्तों में इसका असर दिखने लगता है और शरीर हल्का महसूस होने लगता है।

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