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चारधाम यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, यमुनोत्री हाईवे सहित इन रास्तों पर भूस्खलन का डर होगा खत्म

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देहरादून, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों और सीमांत क्षेत्र के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य के सबसे संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए 461 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को हरी झंडी दे दी है।

यह बजट मुख्य रूप से दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, NH-134 और NH-09, के उन हिस्सों को सुरक्षित बनाने के लिए खर्च किया जाएगा जो मानसून और आपदा के समय अक्सर बंद हो जाते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय को राज्य की बुनियादी अवसंरचना के लिए संजीवनी करार देते हुए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत उत्तरकाशी जिले में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-134 पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाले धरासू और कुठनोरी मार्ग पर चिन्हित किए गए 17 खतरनाक भूस्खलन स्थलों के उपचार के लिए 233 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

NH-134 पर होने वाला यह कार्य सामरिक और धार्मिक दोनों लिहाज से अहम है। भूस्खलन की वजह से अक्सर यमुनोत्री यात्रा घंटों बाधित रहती है, जिससे न केवल पर्यटन प्रभावित होता है बल्कि स्थानीय सप्लाई चेन भी टूट जाती है।

वहीं, पिथौरागढ़ जिले में भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-09 के तवाघाट-घटियाबागड़ खंड पर भी बड़े स्तर पर काम होगा। यहाँ के 3 सबसे संवेदनशील और जानलेवा बन चुके स्थलों के उपचार के लिए 228 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

तवाघाट-घटियाबागड़ खंड की भौगोलिक स्थिति अत्यंत जटिल है। यहाँ होने वाला सुधार कार्य न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बनेगा, बल्कि भारतीय सेना की मूवमेंट और रसद आपूर्ति के लिहाज से भी इस मार्ग को ‘ऑल-वेदर’ मजबूती प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह निवेश आपदा जोखिम को कम करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षित सड़कें ही राज्य में पर्यटन और आर्थिक विकास का आधार हैं।

परियोजना के तहत इन स्थलों पर रिटेनिंग वॉल, रॉक बोल्टिंग और कंक्रीट स्प्रेइंग जैसी आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहाड़ों के दरकने की समस्या पर स्थायी लगाम लगने की उम्मीद है।

धामी ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य के तालमेल से उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों तक निर्बाध संपर्क स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है। इस मंजूरी के बाद अब संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर धरातल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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