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Binddii 18th September 2025 : तिहाड़ जेल से निकली बिंद्दी, माँ को किया बड़ा वादा

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Binddii 18th September 2025 : तिहाड़ जेल से बाहर निकलते ही बिंदिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान खिल उठी। उसकी माँ काजल की बातें उसके कानों में गूँज रही थीं—वो हमेशा अपनी बेटी को मुस्कुराते देखना चाहती थी।

पुलिस और एक एनजीओ की टीम बिंदिया को उस पते पर ले जा रही थी, जो काजल ने उन्हें दिया था—मथुरा। जेल के अंदर, काजल को दूसरी कैदी महिलाएँ ढाँढस बाँध रही थीं। वे कह रही थीं कि ये बिंदिया की नई शुरुआत है, जो उसे खुशियाँ देगी।

मथुरा का रंग, बिंदिया का आश्चर्य

रास्ते में बिंदिया को शहर की भीड़, ट्रैफिक और शोर डराने लगे। तभी उसकी नजर एक मेट्रो ट्रेन पर पड़ी, जिसे देखकर वह हैरान रह गई। उसने एनजीओ की रश्मि से पूछा, “क्या मथुरा में भी मेट्रो है?” रश्मि ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “नहीं, मथुरा में मेट्रो नहीं है।” बिंदिया ने फिर पूछा, “तो मथुरा में क्या है?”

जब वे मथुरा पहुँचे, तो वहाँ “राधे-राधे” की गूँज और तिलक द्वार देखकर बिंदिया की आँखें चमक उठीं। रश्मि ने उसे आइसक्रीम खाने को कहा। बिंदिया को पता चला कि आइसक्रीम की कीमत 10 रुपये है, तो उसने रश्मि से पैसे लेने से मना कर दिया। रश्मि ने समझाया कि ये पैसे उसकी माँ ने जेल में मेहनत करके कमाए हैं।

आइसक्रीम का स्वाद लेते हुए बिंदिया ने एक गुब्बारे बेचने वाले को देखा, जिसके गुब्बारे हवा में उड़ रहे थे। वह दौड़कर उनके पीछे भागी। रश्मि और कॉन्स्टेबल भी उसके पीछे दौड़े। गुब्बारे तो नहीं पकड़े गए, लेकिन बिंदिया ने एक विशाल नदी देखी। रश्मि ने पूछा, “तू ऐसे क्यों भागी?” बिंदिया ने जवाब दिया, “ये नदी कितनी बड़ी है!” रश्मि ने बताया कि ये यमुना नदी है।

बिंदिया ने अपनी डायरी में लिखा कि जब वह अपनी माँ को जेल से आजाद करवाएगी, तो सबसे पहले उसे यमुना दिखाएगी। रश्मि ने सोचा कि बिंदिया कितनी प्यारी बच्ची है और उसे उम्मीद है कि जहाँ वह जा रही है, वहाँ उसे ढेर सारा प्यार मिलेगा।

सुदर्शन का घर: प्यार या तनाव?

दूसरी तरफ, सुदर्शन अपने घर में लक्ष्मी माँ की पूजा कर रही थी। उसने अपने पैसे के डिब्बे को खोलकर शिकायत की कि उसका पैसा दोगुना क्यों नहीं हो रहा। तभी बच्चे लाडली और शुभम आए और स्कूल की फीस के लिए पैसे माँगे। सुदर्शन ने उन्हें उनके पिता सौरव से पैसे माँगने को कहा। बच्चों ने सौरव को बताया कि अगर फीस नहीं भरी, तो स्कूल से निकाल दिया जाएगा।

सौरव ने बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा और वादा किया कि वह पैसे का इंतजाम करेगा। सुदर्शन ने तंज कसा, “तुम कपड़े सिलकर पैसे कहाँ से लाओगे? मैं तो यहाँ रानी बनकर रहने आई थी, लेकिन अब नौकरानी की तरह जी रही हूँ।”

काजल का पत्र: सच्चाई का खुलासा

तभी एनजीओ की रश्मि सौरव के घर पहुँची और पूछा कि क्या ये सौरव चतुर्वेदी का घर है। सौरव ने हाँ कहा। रश्मि ने बताया कि उनकी बहन काजल ने उन्हें भेजा है। सुदर्शन ने बीच में टोकते हुए कहा कि काजल तो मर चुकी है। लेकिन रश्मि ने खुलासा किया कि काजल जिंदा है और दिल्ली की जेल में सजा काट रही है। सौरव और सुदर्शन को यकीन नहीं हुआ।

रश्मि ने काजल का पत्र दिखाया, जिसमें उसने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और अपनी बेटी बिंदिया को उनकी देखभाल में भेजने की बात लिखी थी। सौरव ने पत्र पढ़ा और हैरान रह गया। सुदर्शन ने कहा, “दो झटके—काजल जिंदा है और उसने अपनी बेटी यहाँ भेज दी!” रश्मि ने बिंदिया को बुलाया और उसे सौरव को मामा और सुदर्शन को मामी के रूप में मिलवाया।

सुदर्शन ने बिंदिया को घर में रखने से मना कर दिया, लेकिन कॉन्स्टेबल ने उसे रोका। सौरव ने सुदर्शन को एक तरफ ले जाकर कहा कि अगर काजल जिंदा है, तो उन्हें उससे कई सवालों के जवाब चाहिए। साथ ही, घर काजल के नाम पर है, और अगर वे बिंदिया को नहीं रखेंगे, तो काजल उन्हें घर से निकाल सकती है। सुदर्शन ने फिर मधुर स्वर में कहा कि वे बिंदिया को रख लेंगे और उसका ख्याल रखेंगे।

रश्मि ने बताया कि एनजीओ की टीम समय-समय पर बिंदिया की देखभाल की जाँच करेगी। रश्मि ने सौरव से बिंदिया का ध्यान रखने को कहा और चली गई। उसने कॉन्स्टेबल से कहा कि काजल ने अपने भाई पर भरोसा किया, लेकिन सुदर्शन पर उसे शक है।

बिंदिया का नया घर: सपने और आँसू

बिंदिया घर में इधर-उधर देख रही थी। सौरव ने उससे पूछा कि वह क्या कर रही है। बिंदिया ने मासूमियत से जवाब दिया कि वह जेल और इस घर का फर्क देख रही है। सुदर्शन ने तल्खी से कहा कि उनकी जिंदगी तब तक अच्छी थी, जब तक बिंदिया की माँ ने इसे बर्बाद नहीं किया। बिंदिया ने पूछा कि उसकी माँ ने क्या किया, लेकिन सौरव ने सुदर्शन को चुप करा दिया।

बिंदिया ने बताया कि जेल में घंटी बजने पर ही खाना खाते थे। तभी उसे एक सीटी की आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर रसोई में गई और सीटी को छूने लगी। सुदर्शन ने गुस्से में उसे डाँटा और उस पर पानी डालकर कहा कि “शुद्धिकरण” जरूरी है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि वह जेल में किनके साथ रही। बिंदिया रोने लगी।

सुदर्शन की क्रूरता, बिंदिया की मासूमियत

सुदर्शन ने बिंदिया का बैग चेक किया। उसने एक किताब देखी और उसे फेंक दिया। फिर उसे कुछ पैसे मिले, जिन्हें वह खुशी-खुशी रखने लगी। जब उसने एक गुड़िया देखी, तो उसे भी फेंक दिया। बिंदिया ने गुड़िया को पकड़ लिया और रोते हुए कहा कि ये उसकी माँ है, इसे मत फेंको। सुदर्शन ने पैसे लेकर खुशी मनाई और अंदर चली गई। बिंदिया अपनी गुड़िया को गले लगाकर रोती रही।

काजल की उम्मीदें

जेल में काजल ने अपनी बेटी की गुड़िया को देखा और कहा कि वह रो नहीं सकती, क्योंकि बिंदिया चाहती है कि वह खुश रहे। उसने वादा किया कि वह अपनी बेटी को एक नई और खुशहाल जिंदगी देना चाहती है।

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