Chhath Puja Rules : हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में भी इसका आकर्षण बढ़ गया है।
छठ पूजा चार दिन तक चलने वाला व्रत है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है।
इस व्रत में कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि आप इन नियमों को नहीं मानते हैं, तो पूजा का फल अधूरा रह सकता है। आइए जानते हैं, छठ पूजा के दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए।
सूर्य को अर्घ्य दिए बिना कुछ न खाएं
छठ पूजा में व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य देव को अर्घ्य दिए बिना कोई भी भोजन ग्रहण नहीं कर सकतीं। साथ ही व्रती को जमीन पर सोना चाहिए और शरीर तथा मन को शुद्ध रखना चाहिए।
धातु के बर्तनों का प्रयोग न करें
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, छठ पूजा में मिट्टी के बर्तन और चूल्हे ही इस्तेमाल करने चाहिए। चांदी, स्टील, पीतल या प्लास्टिक के बर्तन व्रत की पवित्रता को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रसाद बनाते समय जूठा न करें
छठ पूजा का प्रसाद अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे तैयार करते समय और बनाने से पहले कुछ भी खाना या चखना वर्जित है।
साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
व्रत और पूजा के दौरान स्वयं और अपने आसपास की सफाई बनाए रखना बेहद जरूरी है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों को साफ हाथों से ही छूना चाहिए।
सात्विक आहार लें
व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए। तामसिक आहार, लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित है। यह नियम मानसिक और शारीरिक शुद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रसाद की तैयारी के स्थान को हमेशा साफ रखें
जिस जगह पर आप प्रसाद तैयार करते हैं, वहाँ कभी भी खाना न खाएं और जगह को हमेशा साफ रखें। इससे पूजा की पवित्रता बनी रहती है।
व्रत रखते समय शांति बनाए रखें
व्रत के दौरान अपशब्द बोलना वर्जित है। शांत और निर्मल मन से ही पूजा अर्चना करनी चाहिए। छठ पूजा का यह चार दिवसीय व्रत न केवल आध्यात्मिक फल देता है, बल्कि जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि भी लाता है।
इसलिए इन नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।









